दिल्ली का एक परिवार महंगे रेस्टोरेंट में खाना खाने गया था, जहां उनकी रेस्टोरेंट स्टाफ से बहस हो गई। परिवार के मुताबिक, रेस्टोरेंट वालों ने 949 रुपये का सर्विस चार्ज मांगा था। विरोध करने पर रेस्टोरेंट स्टाफ ने उन्हें घेर लिया और जबरन पैसे वसूले। इसके बाद पीड़ित परिवार कंज्यूमर कोर्ट गया, जहां कोर्ट ने व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेस्टोरेंट को 25,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
यह मामला 19 अक्टूबर 2024 का है। नीरज दुबे अपने परिवार के साथ हाउस ऑफ बोहो (House of BOHO) नाम के रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। नीरज दुबे ने सर्विस चार्ज को लेकर विरोध जताया था जबकि रेस्टोरेंट स्टाफ ने सर्विस चार्ज कम नहीं किया। इसी बात को लेकर नीरज दुबे की रेस्टोरेंट स्टाफ के साथ बहस हो गई। नीरज दुबे ने दावा किया कि इस घटना से उन्हें न सिर्फ धनहानि हुई, बल्कि उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा था।
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रेस्टोरेंट ने किया बुरा सलूक
नीरज दुबे के मुताबिक, जब उन्होंने 949 रुपये सर्विस चार्ज देने से मना किया, तो उन्होंने रेस्टोरेंट के कर्मचारियों से कहा कि सर्विस चार्ज ग्राहक अपनी इच्छा से देता है, इसलिए इसे जबरन नहीं लिया जा सकता। इस दावे को अनसुना करते हुए रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि वहां सर्विस चार्ज देना अनिवार्य है। जब नीरज दुबे बिना सर्विस चार्ज दिए जाने लगे, तो रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने उन्हें और उनके परिवार को कथित तौर पर घेर लिया। इसके बाद मजबूरन नीरज को सर्विस चार्ज देना पड़ा।कोर्ट पहुंचा ग्राहक
इसके बाद नीरज दुबे कंज्यूमर कोर्ट गए, जहां उन्होंने रेस्टोरेंट के खिलाफ मुकदमा दायर किया। कोर्ट में दलील दी गई कि रेस्टोरेंट का अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज मांगना गलत है। यह 2022 की CCPA गाइडलाइन के खिलाफ है। इस गाइडलाइन में साफ तौर पर लिखा है कि ग्राहक पर सर्विस चार्ज थोपा नहीं जा सकता।
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इसके बाद कंज्यूमर कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाउस ऑफ बोहो (House of BOHO) रेस्टोरेंट ग्राहक को 949 रुपये का सर्विस चार्ज लौटाए। साथ ही, मानसिक उत्पीड़न के लिए ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा भी दे।
