पंजाब में पार्टी के भीतर मची अंदरूनी कलह के बीच कांग्रेस हाईकमान ने शनिवार को बड़ा फैसला लिया है। भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब प्रभारी बनाया गया है। बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पंजाब के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने सचिन पायलट की नियुक्त का स्वागत किया और कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद जताया।
कांग्रेस हाईकमान ने छह राज्यों के प्रभारी बदले हैं। कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का अतिरिक्त प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया है। डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद महाराष्ट्र और पीवी. मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।
आंतरिक कलह से कैसे निपटेंगे पायलट
पंजाब कांग्रेस में छिड़ी अंदरूनी कलह और अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले सचिन पायलट की नियुक्त बेहद अहम मानी जा रही है, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के अंदर छिड़े घमासान को शांत करने की है। पिछले पांच साल में सचिन पायलट पंजाब के प्रभारी बनने वाले राजस्थान के दूसरे नेता हैं। इससे पहले हरीश चौधरी पंजाब के प्रभारी रह चुके हैं।
हरीश रावत: जब कैप्टन अमरिंदर सिंह सत्ता में थे तब उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत को पंजाब का प्रभारी बनाया गया था। उस वक्त सिद्धू और कैप्टन के बीच सियासी खींचतान चरम पर थी। नतीजा यह हुआ कि अमरिंदर सिंह को अपना पद और बाद में पार्टी छोड़नी पड़ी। कांग्रेस हाईकमान ने चन्नी को सीएम बनाया तो उस वक्त भी पार्टी के भीतर कई नेता खफा थे। हरीश रावत चाहकर भी आंतरिक कलह खत्म नहीं कर सके।
हरीश चौधरी: हरीश रावत के बाद कांग्रेस हाईकमान ने साल 2021 में राजस्थान के दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश चौधरी को पंजाब का प्रभारी बनाया। चौधरी को भी पार्टी के भीतर खींचतान विरासत में मिली। मंत्रिमंडल में नियुक्त और विभागों के बंटवारे पर चन्नी और सिद्धू के बीच सियासी रार छिड़ गई। नतीजा यह हुआ कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से चली गई।
देवेंद्र यादव: 2023 में कांग्रेस ने दिल्ली की बादली विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे देवेंद्र यादव को प्रभारी बनाया। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रताप सिंह बाजवा समेत कई कांग्रेस नेताओं ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन का विरोध किया। दूसरी तरफ नवजोत सिंह सिद्धू इसके पक्ष में थे। हालांकि चुनाव दोनों पर्टियों ने अलग-अलग लड़ा, लेकिन पार्टी के भीतर आपसी मतभेद देवेंद्र यादव भी दूर नहीं कर सके।
भूपेश बघेल: देवेंद्र यादव के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल को पिछले साल ही पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। उनके सामने भी पार्टी में गुटबाजी को खत्म करने की सबसे बड़ी चुनौती थी। मगर अपने तीन उत्तराधिकारियों की तरह बघेल भी असफल रहे। अबकी बार पार्टी में खींचतान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के बीच छिड़ी थी। मामला कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचा।
राहुल गांधी का 24 घंटे में बड़ा फैसला
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को पंजाब के मुद्दे पर अहम बैठक की। इसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल रहे। सभी नेताओं ने पंजाब यूनिट के आंतरिक मतभेद को सुलझाने पर विचार विमर्श किया। नतीजा यह हुआ कि बैठक के 24 घंटे बाद ही सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी बनाया दिया गया, क्योंकि भूपेश बघेल की भूमिका पर पंजाब के नेता सवाल उठा रहे थे। नियुक्त के कुछ क्षण बाद ही चन्नी का स्वागत और हाईकमान को धन्यवाद देना बड़ा संकेत दे रहा है।
