आज जिस पंजाब को हम जानते हैं वह 1947 से पहले ऐसा नहीं था। 1947 से पहले पंजाब आज से कहीं ज्यादा बड़ा था और इसमें हिंदू, मुस्लिम और सिख बड़ी आबादी में रहते थे लेकिन साल 1947 में भारत के दो टुकड़े कर दिए गए। इस विभाजन का सबसे ज्यादा असर पंजाब पर ही पड़ा। पंजाब में आज तक भी लोग इस विभाजन के दर्द को नहीं भूल पाए हैं। लाखों लोग पाकिस्तान के हिस्से में गए पंजाब से भारत के हिस्से में आए पंजाब में आए और वह भी अपना सब कुछ पीछे छोड़कर। हर साल आजादी के जश्न के साथ बंटवारे का दर्द भी याद आता है। इसी कड़ी में चंडीगढ़ में 13 अग्सत को एक बड़ा विचार-चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
यूनाइटेड पंजाबी ऑर्गेनाइजेशन, चंडीगढ़ द्वारा इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन (IDC), चंडीगढ़ के सहयोग से 13 अगस्त 2026 को पंजाब के 15 अगस्त 1947 के विभाजन के संदर्भ में एक विशेष विचार-चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे शुरू होगा। इसमें विभाजन के मुद्दे पर चर्चा होगी और सांप्रदायिक आधार पर हुए इस बंटवारे से हुए नुकसान पर भी चर्चा की जाएगी।
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किन विचारों पर होगी चर्चा?
इस कार्यक्रम के संबंध में संस्था के संस्थापक तथा पंजाब, पंजाबी भाषा और पंजाबियत के मुद्दों से गंभीरता से जुड़े हुए पंजाबी के जाने-माने लेखक एवं चिंतक सरदार हरविंदर सिंह ने बताया कि इस विचार-चर्चा का विषय सांप्रदायिक आधार पर पंजाब के विभाजन का विरोध करने वाले पंजाबी राजनीतिज्ञों, विशेष रूप से सर छोटू राम और सर खिजर हयात खान टिवाना, के दृष्टिकोण तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता से संबंधित है।
1947 में हुए नुकसान पर होगी चर्चा
सरदार हरविंदर सिंह ने खबरगांव से बात करते हुए बताया कि सांप्रदायिक आधार पर किए गए बंटवारे से किसी को भी कुछ हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इस बंटवारे से सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब को हुआ है और भारत और पाकिस्तान दोनों देशों को इसका नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने आगे बताया कि सांप्रदायिक आधार पर हुए बंटवारे से ना पहले किसी को लाभ हुआ और ना ही आगे किसी को लाभ हुआ। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अविभाजित पंजाब में कई नेताओं और लोगों ने सांप्रदायिक आधार पर हुए इस बंटवारे का विरोध किया था। इस संबंध में सर छोटू राम और सर खिजर हयात खान टिवाना का नाम प्रमुख था। हालांकि, इनके विचारों को दरकिनार कर उस समय धर्म के आधार पर भारत या यूं कहें कि पंजाब का बंटवारा कर दिया गया।
पंजाब को हुआ नुकसान
भारत के बंटवारे का सबसे ज्यादा असर पंजाब पर ही पड़ा। पाकिस्तान के हिस्से में आए पंजाब में लाखों की संख्या में हिंदू और सिख रहते थे, जिनके वहां कारोबार भी थे। हालांकि, बंटवारे के कारण उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भारत के हिस्से में आए पंजाब में आना पड़ा। उस समय पंजाब ने अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी देखी। लोगों का कहना है कि विभाजन से पंजाब, पंजाबियत और पंजाबियों का नुकसान हुआ है। पंजाब की संस्कृति पर भी इसका असर पड़ा है।
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कौन होंगे मुख्य वक्ता?
यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशन (IDC), 150, सेक्टर 38, चंडीगढ़ में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में IDC के निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार, किसान एवं खेत मज़दूर आयोग के अध्यक्ष डॉ. सुखपाल सिंह, प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं चिंतक डॉ. प्यारे लाल गर्ग, प्रसिद्ध लेखक एवं चिंतक डॉ. मनमोहन तथा प्रो. रौंकी राम मुख्य वक्ताओं के रूप में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
पंजाबी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो बी. एस. घुम्मन, चिंतक एवं पंजाब सरकार के पूर्व प्रधान सचिव सरदार जसपाल सिंह, प्रसिद्ध लेखक श्री जंग बहादुर गोयल, वरिष्ठ पत्रकार सरदार सरबजीत सिंह धालीवाल तथा सरदार बलविंदर सिंह जम्मू विशेष अतिथि वक्ताओं के रूप में कार्यक्रम में अपने विचार साझा करेंगे।
