चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में गुरु नानक सिख स्टडीज विभाग और बाबा फतेह सिंह स्टडी सर्कल ने 'स्वामी विवेकानंद और चेतना' विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रव्यापी पहल ‘विवेकानंद 125– फ्रोम कैम्पस टू कम्युनिटी’ के तहत आयोजित किया गया।

 

पंजाब विश्वविद्यालय के पीएचडी शोधार्थी, बाबा फतेह सिंह स्टडी सर्कल और उत्तर भारत के संस्थापक-निदेशक के. पुष्पिंदर सिंह ने बताया कि व्याख्यान में लेखक, नीति शोधकर्ता एवं विवेकानंद केंद्र, उत्तरी क्षेत्र के उपप्रमुख डॉ. निखिल यादव ने स्वामी विवेकानंद के पंजाब से गहरे संबंधों और उनके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

 

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स्वामी विवेकानंद के पंजाब लगाव पर चर्चा 

डॉ. निखिल यादव ने अविभाजित पंजाब की स्वामी विवेकानंद की यात्राओं, उनके शिष्यों एवं गुरु-भाइयों के साथ प्रवास तथा पंजाब की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति उनके लगाव पर चर्चा की। उन्होंने श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रति स्वामी विवेकानंद की गहरी श्रद्धा का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वामीजी गुरु गोबिंद सिंह जी को त्याग, साहस, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का आदर्श मानते थे।

भगत सिंह निबंध में विवेकानंद का उल्लेख

व्याख्यान में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और क्रांतिकारी विचारधारा पर स्वामी विवेकानंद के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। इस संदर्भ में डॉ. निखिल यादव ने शहीद भगत सिंह के वर्ष 1923 में लिखे निबंध ‘The Problem of Punjab’s Language and Script’ का उल्लेख किया। लगभग 16 वर्ष की आयु में भगत सिंह ने पंजाब हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता के लिए यह लेख लिखा था। इस निबंध में भगत सिंह ने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख किया है, जो उस समय के बौद्धिक एवं वैचारिक परिवेश में उनके विचारों की प्रासंगिकता को दर्शाता है।

 

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सत्र में स्वामी विवेकानंद के चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास, आत्मबोध और उद्देश्यपूर्ण जीवन के संदेश पर भी विचार-विमर्श हुआ। डॉ. यादव ने युवाओं और विशेष रूप से जेन-जी (Gen Z) से अपनी क्षमताओं को पहचानने और अपनी ऊर्जा को समाज सेवा और राष्ट्रनिर्माण में लगाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में पंजाब विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

 

'विवेकानंद 125– फ्रोम कैम्पस टू कम्युनिटी' की शुरुआत 11 सितंबर 2026 को आईआईटी मद्रास से हुई थी। इस राष्ट्रव्यापी पहल का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के विचारों को देश के शैक्षणिक परिसरों और गांवों तक पहुंचाना तथा युवाओं को चरित्र निर्माण, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित करना है।