मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड किए गए जनपद पंचायत के सब इंजीनियर सतीश समेले ने अब मीडिया के सामने आकर कई खुलासे किए हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं अकेला नहीं हूं बल्कि पूरे डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार चलता है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव से लेकर जिवा स्तर तक सभी को कमीशन चाहिए और भोपाल वालों को भी सूटकेस जाता है। उनके इन दावों के बाद से सोशल मीडिया पर उनकी वीडियो वायरल हो रही है।

 

उन्होंने यह दावा किया कि सभी कमीशन लेते हैं। उन्होंने कहा, 'कौन माई का लाल है जो जनपद से लेकर भोपाल तक पैसे नहीं खाता। अगर पैसा नहीं ले रहा है तो अपने बेटे की कसम हनुमान जी के सामने खाए। मैं मान जाऊंगा।'

 

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भोपाल तक कमीशन का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही काम शुरू होता है, कमीशन का खेल भी शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा, 'सरपंच को 10 प्रतिशत, 5 प्रतिशत सचिव, 3 प्रतिशत सीआरएस को, 5 प्रतिशत सब इंजीनियर और 2 से 3 प्रतिशत जनपद सीईओ को चाहिए।' इतना ही नहीं उन्होंने भोपाल से दिल्ली तक कमीशन जाने का आरोप लगाया है। 

 

उन्होंने कहा, 'जितने भी अधिकारी ऊपर से आते हैं चाहे भोपाल से ही क्यों ना आए। उसके लिए सूटकेस दिए जाते हैं और हम ही सूटकेस देते हैं। सब इंजीनियर वसूली एजेंट बनकर रह गया है। मैं तो कोर्ट में प्रमाण दूंगा।' उनका कहना है कि पूरी व्यवस्था कमीशन पर आधारित है। 

बलि का बकरा बनाने का आरोप

उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पूरे सिस्टम को बचाने की कोशिश है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि  हाईकोर्ट में सभी प्रमाण पेश कर बताएंगे कि किस तरह वसूली होती है और सब इंजीनियरों को बलि का बकरा बनाया जाता है। उनका आरोप है कि भोपाल तक के अधिकारी भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं।

 

उन्होंने कहा, 'मैं खुद भी इस व्यवस्था का हिस्सा रहा हूं और मेरे से भी वसूली कराई गई। सब इंजीनियर सिर्फ वसूली एजेंट बनकर रह गयए हैं। कब-कब चंदा हुआ और किस तरह पैसा नीचे से ऊपर तक पहुंचा, इसके ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड मेरे पास हैं। ये सभी सबूत हाईकोर्ट में पेश करूंगा।'

 

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क्यों हुए थे सस्पेंड?

सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में काम कर रहे हैं। उनके खिलाफ सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि वह निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर जाते थे। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस का जवाब देते हुए उन्होंने इस बात को स्वीकार किया था कि वह निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर जाते हैं। इसके बाद उन्हें सस्पेंड करके विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।