बिहार के बेगूसराय के रतनपुर थाना क्षेत्र स्थित बालिका गृह से रहस्यमय तरीके से लापता हुई पांच नाबालिग लड़कियों के मामले में बेगूसराय पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पांच में से तीन बच्चियों को सकुशल बरामद कर लिया है। बाकी दो बच्चियों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक मनीष कर रहे हैं।
बताया गया है कि रतनपुर स्थित बालिका गृह से पांच नाबालिग लड़कियां बिना किसी को बताए अचानक गायब हो गई थीं। सुबह जब स्टाफ ने रोल कॉल किया तो पांच बिस्तर खाली मिले। खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। बालिका गृह से बच्चियों के लापता होने की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन हरकत में आया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत थाना पुलिस के साथ तकनीकी टीम और सर्विलांस यूनिट को भी लगाया गया।
पुलिस ने सबसे पहले बालिका गृह और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में बच्चियों को देर रात दीवार फांदकर बाहर निकलते देखा गया। इसके बाद पुलिस ने आसपास के सभी थानों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर अलर्ट जारी कर दिया। तकनीकी टीम ने बच्चियों के मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल भी ट्रेस की। इसी कड़ी मेहनत का नतीजा रहा कि 48 घंटे के अंदर तीन बच्चियों का पता लगा लिया गया। तीनों बच्चियों को जिले के अलग-अलग इलाकों से सुरक्षित बरामद किया गया।
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पुलिस के अनुसार बच्चियां डर के कारण कहीं छिपी हुई थीं। उन्हें बरामद करने के बाद सबसे पहले मेडिकल जांच कराई गई ताकि उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट हो सके। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार तीनों नाबालिगों को बाल कल्याण समिति यानी CWC के सामने पेश किया गया। समिति के आदेश के बाद उन्हें वापस बालिका गृह भेज दिया गया है। अभी तीनों बच्चियां सुरक्षित हैं और उनसे पूछताछ भी की जा रही है ताकि बाकी दो बच्चियों के बारे में कोई सुराग मिल सके।
SP ने खुद संभाला मोर्चा
इस घटना के बाद बेगूसराय के पुलिस अधीक्षक मनीष ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही वह रतनपुर बालिका गृह पहुंचे। वहां उन्होंने पूरे परिसर का निरीक्षण किया और तैनात वार्डन समेत अन्य कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की। एसपी ने सदर एसडीपीओ और रतनपुर थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि अगर जांच में बालिका गृह के किसी भी कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाकी दो बच्चियों को खोजने के लिए पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। एक टीम तकनीकी इनपुट के आधार पर काम कर रही है तो दूसरी टीम फील्ड में छापेमारी कर रही है। आसपास के जिलों की पुलिस को भी सूचना दे दी गई है। रेलवे और बस अड्डों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही बाकी दोनों बच्चियों को भी सकुशल बरामद कर लिया जाएगा।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बालिका गृह और बाल सुधार गृहों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में बेगूसराय के बाल सुधार गृह से भी पांच बच्चे फरार हो गए थे। उन्हें भी पुलिस ने 12 घंटे के अंदर पकड़ लिया था। एक साल में दो बार इस तरह की घटना होने के बाद अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि बालिका गृह में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। रात में गश्त नहीं होती, दीवारें कमजोर हैं और स्टाफ की कमी है।
बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने भी बालिका गृह का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि बच्चियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। अगर स्टाफ अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाएगा तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तय है। समिति ने सरकार से मांग की है कि सभी बालिका गृहों में सीसीटीवी, बाउंड्री वॉल और अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की जाए। पुलिस का पूरा फोकस बाकी दो बच्चियों को ढूंढने पर है। एसपी मनीष ने कहा है कि बच्चियों की बरामदगी के साथ-साथ इस बात की भी जांच होगी कि वो गृह से बाहर कैसे निकलीं। अगर इसमें किसी कर्मचारी की भूमिका होगी तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा।
