बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के हाथीमल खांता जंगल के पास बकरियां चराने गए 65 साल के रामनाथ पासवान पर एक बाघ ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में वह बुरी तरह घायल हो गए और उनके हाथ और पैर पर बहुत गहरे घाव आ गए। उनकी चीखें सुनकर आसपास के लोग और वन विभाग के कर्मचारी तुरंत वहां पहुंचे। उन्होंने बुजुर्ग को बचाकर अस्पताल पहुंचाया। ज्यादा खून बह जाने के कारण उनकी हालत बहुत नाजुक बनी हुई है।
हाथीमल खांता गांव के रहने वाले रामनाथ पासवान रोज सुबह अपनी बकरियां लेकर जंगल के पास चराने गए थे। तभी झाड़ियों में छुपे एक बाघ ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। बाघ ने उनके पैर और हाथ को अपने पंजों से दबोच लिया। बुजुर्ग के जोर से चीखने की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़कर मौके पर आए। लोगों के शोर मचाने और वन विभाग की टीम के पहुंचने पर बाघ बुजुर्ग को छोड़कर वापस जंगल की तरफ भाग गया।
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अस्पताल में इलाज
इस घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम फौरन मौके पर पहुंच गई। घायल बुजुर्ग को सुरक्षित बाहर निकालकर इलाज के लिए पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां के डॉक्टरों ने हालत की गंभीरता को देखते हुए उन्हें बेतिया के अनुमंडलीय अस्पताल में भेज दिया। डॉक्टरों का कहना है कि बुजुर्ग के शरीर पर कई गहरे जख्म हैं। बहुत ज्यादा खून बह जाने की वजह से उनकी हालत बहुत खराब है। डॉक्टरों की पूरी टीम लगातार उनका इलाज करने में लगी हुई है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के तमाम लोग भी अस्पताल में उनका हालचाल जानने के लिए आ रहे हैं। वन विभाग के बड़े अधिकारियों ने भी अस्पताल आकर पूरी बात की जानकारी ली। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिया है।
गांवों में डर का माहौल
इस डरावनी घटना के बाद से हाथीमल खांता और उसके आसपास के गांवों में डर फैल गया है। कोई भी व्यक्ति अब जंगल की तरफ जाने की हिम्मत नहीं कर रहा है। बकरियां चराने वाले लोग सहमे हुए हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि खबर मिलते ही विभाग की टीम सतर्क हो गई है। बाघ का पता लगाने के लिए जंगल में लगातार गश्त की जा रही है। कैमरों और ड्रोन से नजर रखी जा रही है। लोगों को माइकिंग के जरिए सावधान किया जा रहा है। वन विभाग ने अपील की है कि लोग अकेले जंगल के अंदर न जाएं। सुबह और शाम के समय जंगल के किनारे न भटकें। जानवर चराने के लिए लोग समूह में जाएं और अपने साथ लाठी-डंडा रखें।
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ग्रामीणों की मांग और मुआवजा
गांव वालों का कहना है कि जंगल और गांव पास होने की वजह से हमेशा खतरा बना रहता है। रोजी-रोटी के लिए मजबूरन लोगों को जंगल पर निर्भर रहना पड़ता है। कुछ महीने पहले भी इसी इलाके में बाघ द्वारा एक जानवर पर हमला करने की बात सामने आई थी। घायल बुजुर्ग के परिवार वालों ने सरकार से आर्थिक मदद और अच्छे इलाज की मांग की है। वे परिवार में कमाने वाले अकेले इंसान हैं। सरकार को आगे आकर उनकी मदद करनी चाहिए। वन विभाग ने भरोसा दिलाया है कि सरकारी नियम के हिसाब से पीड़ित परिवार को पूरा मुआवजा दिया जाएगा। घायल बुजुर्ग के इलाज का सारा खर्च भी विभाग द्वारा ही उठाया जाएगा।
