उत्तर प्रदेश मथुरा में चार साल की मासूम बच्ची के साथ कथित तौर पर ट्यूशन टीचर द्वारा की गई हैवानियत का मामला तूल पकड़ गया है। आरोप है कि बच्ची को पहले बेरहमी से पीटा गया और फिर वॉशिंग मशीन में खड़ा कर थप्पड़ व तमाचे मारे गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने तीन दिन तक कार्रवाई नहीं की। गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण के हस्तक्षेप के बाद ही एफआईआर दर्ज हुई। अब राज्य महिला आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए एसएसपी से कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है।


मामला मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र का है। पीड़ित पिता दीपक ठाकुर वृंदावन स्थित चंद्रदय मंदिर भवन में देवसेवक हैं। उनकी पत्नी सीमा ने बताया कि उनकी चार वर्षीय बेटी अंजलि सारस्वत ट्यूशन पढ़ने जाती थी। अंजलि के साथ उसकी सास वीना शर्मा भी बच्चों को पढ़ाती थीं।

 

परिजनों के अनुसार 15 जुलाई को दोपहर करीब तीन बजे अंजलि ट्यूशन पढ़ने गई थी। शाम को जब वह घर लौटी तो उसके गाल और कान पर लाल निशान थे। पूछने पर बच्ची रोते हुए बोली कि टीचर ने पहले उसकी पिटाई की और फिर उसे वॉशिंग मशीन में खड़ा कर तमाचे मारे। आरोप है कि टीचर के साथ उनकी सास वीना शर्मा ने भी बच्ची को पीटा।

कान और होंठ पर मिले चोट के निशान

मां सीमा का कहना है कि बच्ची के कान और होंठ पर चोट के स्पष्ट निशान थे। अगले दिन जब उन्होंने टीचर से शिकायत की तो आरोप है कि दोनों ने परिवार को धमकाया। इसके बाद परिजन हाईवे थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया और उन्हें लगातार चक्कर लगवाए।

 

यह भी पढ़ें: लखनऊ: 15 मौतों वाली बिल्डिंग पर चला बुलडोजर! 32 दिन बाद LDA का बड़ा एक्शन

3 दिन तक थाने के चक्कर, मंत्री की दखल के बाद FIR

पीड़ित परिवार का आरोप है कि तीन दिन तक पुलिस कार्रवाई टालती रही। बाद में गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण से गुहार लगाई गई। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद 18 जुलाई को पुलिस ने एनसीआर दर्ज कर मामले से पल्ला झाड़ लिया। इससे नाराज परिवार ने राज्य महिला आयोग को भी शिकायत भेज दी।राज्य महिला आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए एसएसपी से कार्रवाई कर जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक भेजने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

पिता का आरोप- दूसरा प्रार्थना पत्र लिखवाया

पीड़िता के पिता दीपक ठाकुर का आरोप है कि पुलिस ने पहले दिए गए प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई नहीं की। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद दूसरा प्रार्थना पत्र लिखवाया गया, जिसमें एक टीचर का नाम हटा दिया गया। परिवार का यह भी आरोप है कि वॉशिंग मशीन में बच्ची को खड़ा कर प्रताड़ित करने जैसी गंभीर बात का भी उल्लेख नहीं किया गया और पुलिस ने इसे सामान्य प्रार्थना पत्र की तरह लिया।

 

यह भी पढ़ें: 24 हजार अनुदेशकों की जीत! सुप्रीम कोर्ट से राहत, क्या मिलेगा 9 लाख रुपये एरियर?

पुलिस का पक्ष क्या है?

सीओ प्रवीण तिवारी का कहना है कि मामला बच्ची से संबंधित होने के कारण नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर न्यायालय भेजी गई है। मजिस्ट्रेट के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। महिला आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट की जानकारी उन्हें नहीं होने की बात भी उन्होंने कही। फिलहाल इस मामले में राज्य महिला आयोग की निगरानी में जांच जारी है और पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।