काफी दिनों से शांत चल रहे मणिपुर में एक बार फिर हिंसा हुई है। 13 सितंबर को राज्य के तमेंगलॉन्ग और नोने जिलों में अचानक हिंसा भड़क उठी। इसमें चार लोगों की मौत हो गई और एक महिला लापता हो गई। बताया जा रहा है कि इन हमलों के पीछे NSCN (IM) और ZUF (K) का हाथ है।
आपको बता दें कि जिस दिन यह हमला हुआ उस दिन कुकी समुदाय हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों की याद में 'ब्लैक डे' मना रहा था। 1990 के दशक में हुई हिंसा में मारे गए और बेघर हुए लोगों की याद में यह दिन मनाया जाता है।
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कब-कब हुए हमले?
पहला हमला तामेंगलोंग के एल टोलन गांव में सुबह करीब चार बजे हमला हुआ। इसमें 42 साल की लहिंगजंगई सिंगसित की मौत हो गई। उनके पति सेखोनेह सिंगसित और 6 साल के बेटे को गोली लगी। सेखोनेह की बाद में अस्पताल में मौत हो गई।
दूसरा हमला दोपहर करीब तीन बजे नोनी के लोंगपी गांव में जुली सिंगसन और रोएल गांगटे मारे गए। दोनों घर का जरूरी सामान लेने के लिए निकले थे। साथ में एक और महिला थी जो लापता है। आशंका जताई जा रही है कि महिला को अगवा कर लिया गया है। एक महिला जिनकी मौत इस हमले में हुई है वह प्रेग्नेंट बताई जा रही है। दोनों पीड़ित लोंगपी गांव के ही रहने वाले थे।
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इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। एल टोलिन गांव के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक हमला नहीं बल्कि गांव के लोगों में फिर से डर पैदा करने के लिए किया जा रहा है। साथ ही, उन्हें अपनी जमीन से बेदखल करने की साजिश है। गांव के लोगों का आरोप है कि हमला सुरक्षा बलों (CISF) की तैनाती वाली जगह से कुछ ही दूरी पर हुआ।
कुकी इन्पी जिरी, तामेंगलोंग और नोनी (जेटीएन) ने राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए 24 घंटे का समय दिया है। साथ ही, उन्होंने 24 घंटे की आर्थिक नाकाबंदी का एलान किया है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन बंद का भी चेतावनी दी है।
