पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सासंद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज से राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान बंग विभूषण वापस ले लिया है। नागेंद्र राय को यह सम्मान 21 फरवरी 2026 को दिया गया था। खास बात यह है कि उस समय राज्य में ममता बनर्जी की सरकार थी। नागेंद्र राय उत्तर बंगाल के कूच बिहार से BJP सांसद हैं और राजबंशी समुदाय के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।

 

सरकार का यह कदम मुख्यमंत्री के उस निर्देश के एक दिन के भीतर आया है जिसमें उन्होंने नेताजी पर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने पुलिस से जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी करने को भी कहा था। उन्होंने साफ किया ता कि कानून सांसद, विदायक और सरकारी अधिकारियों समेत सभी पर समान रूप से लागू होगा।

 

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विवाद कैसे शुरू हुआ?

नागेंद्र राय ने हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को वॉर क्रिमिनल बताया था। उन्होंने नेताजी के नेतृत्व और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। उनके बयान के बाद बंगाल की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद सरकार ने नेताजी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर सख्त कार्रवाई का रुख अपनाया। इसी बीच नागेंद्र राय से बंग विभूषण वापस लेने का फैसला सामने आया।

 

पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने आदेश में कहा कि कुछ नए तथ्य और परिस्थितियां सामने आई हैं जिनसे नागेंद्र राय के पास सम्मान बनाए रखने पर सवाल उठता है। सरकार के मुताबिक, बंग विभूषण को बरकरार रकना सम्मान की गरिमा, प्रतिष्ठा और उद्देश्य के अनुरूप नहीं है।

 

इसी आधार पर सरकार ने 21 फरवरी 2026 को नागेंद्र राय को दिया गया बंग विभूषण तत्काल प्रभाव से वापस लेने और रद्द करने का फैसला किया। हालांकि, सरकारी आदेश में उनकी किसी खास टिप्पणी का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब नेताजी पर उनकी टिप्पणी को लेकर विवाद जारी है।

 

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अनंत महाराज का मामला सुप्रीम कोर्ट में गया

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा सांसद अनंत महाराज के खिलाफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर मानहानिकारक बयान देने के मामले में कोर्ट से खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग को सुनने से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह इस मामले में रिट याचिका दाखिल करें न कि कोर्ट से खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग करें। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, 'याचिका दाखिल कीजिए। आपकी चिंता यह है कि कोई ऐसी टिप्पणी कर रहा है जो हेट स्पीच के बराबर है। आप याचिका दाखिल करें, फिर हम इस पर विचार करेंगे।'