हिमाचल प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक विधायक की कुंडली खूब चर्चा में है। विधायक दो बार जनता का विश्वास जीतकर विधानसभा पहुंच चुके हैं। मुख्यमंत्री भी कई बार उन्हें मंत्री बनाने के संकेत दे चुके हैं। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा भी हो चुकी है। इसके बावजूद मंत्री पद की शपथ का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की ताजपोशी में कौन-सा ग्रह अड़ंगा लगा रहा है?
मामला जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तक पहुंचा तो उनका जवाब भी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाने में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने कुंडली और गृह दशा का जिक्र करते हुए कहा कि जब उनकी कुंडली खुलेगी तो बता देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार ग्रह दशा भी हावी होती है। मुख्यमंत्री के इस चुटीले जवाब ने उस राजनीतिक पहेली को और दिलचस्प बना दिया है, जिसका हल तलाशते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता और कुल्लू के लोग लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की राह देख रहे हैं।
फरवरी में विधानसभा के भीतर किया था मंत्री बनाने का ऐलान
सुंदर सिंह ठाकुर के मंत्री बनने की चर्चाओं ने 17 फरवरी 2026 को उस समय जोर पकड़ा, जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में उन्हें जल्द मंत्री बनाने की बात कही थी। सदन में राजस्व घाटा अनुदान को लेकर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सुंदर ठाकुर के मंत्री बनने का संकेत दिया था। उस समय यह बयान राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा में रहा।
सुंदर सिंह ठाकुर कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं। वह 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बार सदन में पहुंचे। इससे पहले वह प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। फरवरी में मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद उम्मीद बनी कि जल्द ही उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। लेकिन महीने बीतते गए और मंत्री पद की प्रतीक्षा जारी रही।
अगस्त में फिर जगी उम्मीद, मुख्यमंत्री ने कहा था जल्द बनेंगे मंत्री
अगस्त में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाया जा सकता है और इसके लिए कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी का इंतजार है। 11 अगस्त के आसपास मुख्यमंत्री के बयानों से यह संदेश गया कि कैबिनेट विस्तार कभी भी हो सकता है।
सुंदर सिंह ठाकुर को खाली मंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था। यहां तक कि राजनीतिक चर्चाओं में यह संभावना भी जताई गई कि पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक से पहले उनकी ताजपोशी हो सकती है। अगस्त भी बीत गया। मंत्री पद की कुर्सी खाली रही और सुंदर सिंह ठाकुर की प्रतीक्षा आगे बढ़ गई।
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सितंबर में भी कैबिनेट विस्तार के संकेत, फिर अटकी बात
सितंबर में मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर फिर संकेत दिए। उन्होंने कहा था कि सरकार के चार साल पूरे होने से पहले मंत्रिमंडल में खाली पद भरने और विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भरने पर फैसला हो सकता है। इससे सुंदर सिंह ठाकुर के मंत्री बनने की उम्मीदों को एक बार फिर हवा मिली। सवाल वही रहा कि यदि मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी है और मुख्यमंत्री स्वयं कई बार संकेत दे चुके हैं तो फिर अंतिम फैसला क्यों नहीं हो पा रहा? राजनीतिक जानकारों के बीच इसकी वजह मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को माना जा रहा है।
अक्टूबर में दिल्ली तक पहुंचा मामला, सुंदर ठाकुर भी गए साथ
अक्टूबर में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई। 17 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और सुंदर सिंह ठाकुर दिल्ली पहुंचे। तीनों नेताओं के एक ही समय दिल्ली जाने से कांग्रेस हाईकमान के साथ संभावित बैठक और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इस घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना गया क्योंकि मुख्यमंत्री पहले ही कई बार सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाने की बात कह चुके थे। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि दिल्ली में इस बार खाली मंत्री पद को लेकर कोई ठोस फैसला हो सकता है।
दिल्ली दौरे के बाद भी सुंदर सिंह ठाकुर की ताजपोशी का कोई आधिकारिक ऐलान सामने नहीं आया। 26 अक्टूबर को कुल्लू में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने एक बार फिर उनके मंत्री बनने की बात कही। इस बार उनके जवाब में कुंडली और भाग्य का जिक्र था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पिछले एक साल से सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्री बनाने की बात कर रहे हैं और अब जल्द ही उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। यानी ऐलान और उम्मीदों का सिलसिला जारी है, लेकिन शपथ ग्रहण की तारीख अब भी सामने नहीं है।
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आखिर कहां फंस रहा पेंच?
सुंदर सिंह ठाकुर की ताजपोशी में देरी के पीछे सबसे ज्यादा चर्चा मंत्रिमंडल के जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों की है। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, मंत्रिमंडल में राजपूत समुदाय के प्रतिनिधित्व को देखते हुए नए मंत्री के चयन में सामाजिक संतुलन का सवाल उठ रहा है। सुंदर सिंह ठाकुर को शामिल करने पर इस समीकरण को लेकर पार्टी के भीतर विचार-विमर्श की चर्चा है। कुल्लू और मंडी संसदीय क्षेत्र को मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग भी उनके पक्ष में जाती है। समर्थकों का तर्क है कि कुल्लू जिले को सरकार में मजबूत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
कांग्रेस के भीतर अन्य विधायकों को मंत्री बनाने की मांग भी उठती रही है। पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में रहा है। ऐसे में एक पद के लिए कई दावेदार होने से पार्टी नेतृत्व के सामने संतुलन साधने की चुनौती है। मुख्यमंत्री के संकेतों के बावजूद अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व की मंजूरी और पार्टी के व्यापक राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर माना जा रहा है। इन कारणों को राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों में संभावित अड़चनों के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार या कांग्रेस हाईकमान की ओर से सुंदर सिंह ठाकुर की नियुक्ति रोकने की कोई एक आधिकारिक वजह घोषित नहीं की गई है।
अब कुंडली खुलेगी या कैबिनेट का दरवाजा?
सुंदर सिंह ठाकुर के मंत्री बनने का मामला अब केवल एक विधायक की ताजपोशी तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुख्यमंत्री के बार-बार दिए गए संकेतों और कांग्रेस के भीतर फैसले की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। फरवरी में विधानसभा से शुरू हुआ भरोसे का सिलसिला अगस्त में फिर मजबूत हुआ। सितंबर में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हुईं और अक्टूबर में दिल्ली तक मामला पहुंच गया। इसके बावजूद तस्वीर साफ नहीं हुई।
अब मुख्यमंत्री के कुंडली और गृह दशा वाले बयान ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। सवाल यह है कि सुंदर सिंह ठाकुर की कुंडली में मंत्री पद का योग कब फलीभूत होगा? क्या दिल्ली में हुई चर्चा के बाद जल्द ही उन्हें शपथ दिलाई जाएगी या अभी कुछ और राजनीतिक ग्रह-नक्षत्रों का इंतजार करना पड़ेगा? फिलहाल, कुल्लू के इस विधायक के समर्थकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है, मंत्री पद की कुर्सी खाली है, मुख्यमंत्री की हामी भी है, दिल्ली में चर्चा भी हो चुकी है; फिर आखिर मुहूर्त कौन निकालेगा?
