कैब ड्राइवर ने एक महिला को गलत जगह पर उतार दिया। सही जगह पर ले जाने के नाम पर और पैसों की मांग की। उसकी यही हरकत ओला कंपनी को भारी पड़ी। अब उपभोक्ता अदालत ने मानसिक पीड़ा और महिला को हुई दिक्कत के बदले कंपनी को 50 हजार रुपये मुआवजा और 5000 रुपये मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर देने का आदेश दिया। मामला आंध्र प्रदेश के कुरनूल का है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उल्लाजी चेन्नम्मा ने कुरनूल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में ओला के खिलाफ केस दायर किया था। इसमें उन्होंने बताया कि पिछले साल 11 अक्टूबर को सुबह 7:08 बजे पोत्तूर वारी थोता से आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय तक ओला ऑटो बुक किया। मगर मौके पर वाहन अलग आया। गलत वाहन लाने के बावजूद ड्राइवर ओटीपी मांगने पर जोर देने लगा।
यह भी पढ़ें: बिहार में 40 लाख की डकैती, बदमाशों ने सर्राफा कारोबारी को मारी गोली; गहने छीने
सही जगह उतारने के बदले मांगे पैसे
शिकायत में आगे कहा कि गया ड्राइवर ने निर्धारत मार्ग की जगह दूसरा रास्ता अपनाया। महिला और उसकी मांग को गंतव्य से करीब 25 किमी दूर छोड़ सीताराम नगर में नरसाराओपेट-गुंटूर रोड पर रुका और गंतव्य पर छोड़ने के बदले अतिरिक्त किराये की मांग की। मना करने पर ड्राइवर ने मां और बेटी को अलग जगह पर उतार दिया। महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि वह सिविल जज मेन्स एग्जाम देने जा रही थी। महिला ने पांच लाख रुपये का हर्जाना मांगा, लेकिन आयोग पाया कि यह अधिक रकम है। इसके बाद 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
ओला के तर्क खारिज
ओला ने अपने तर्क में कहा कि वह सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है और ग्राहकों को ड्राइवरों से जोड़ता है। इस वजह से ड्राइवर के किसी भी दुर्व्यवहार की खातिर उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। कंपनी ने यह भी बताया कि शिकायत मिलने पर वाहन को सेवा से हटा दिया गया है। ड्राइवर को भी निलंबित किया गया है। यहां तक कि महिला से कोई भुगतान भी नहीं लिया गया था।
अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते: आयोग
उपभोक्ता आयोग ने ओला का दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि खुद को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बताकर आप ग्राहकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं। ड्राइवर को निलंबित करने से यह संकेत मिलता है कि शिकायत में दम थी और ड्राइवर का आचरण अनुचित था।
यह भी पढ़ें: 'ओमान को उड़ा देंगे', 200 साल पुराने साथी को अमेरिका ने क्यों धमकी दी?
उपभोक्ता अदालत ने आगे कहा कि शिकायतकर्ता बेहद ही प्रतिस्पर्धी न्यायिक मुख्य परीक्षा में हिस्सा लेने जा रही थी। इसमें भावनात्मक स्थिरता, समय की पाबंदी और मानसिक संयम की जरूरत होती है। इस स्थिति में एक महिला कैंडिडेट और उसकी मां को सड़क पर बेसहारा उतारना अपमान, मानसिक पीड़ा, असुविधा और कष्ट की वजह बना।
