हिमाचल प्रदेश में होटल चलाना अब और महंगा होने जा रहा है। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से होटलों के संचालन संबंधी सहमति शुल्क के ढांचे में किए गए बदलाव को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सुक्खू सरकार को 'शुल्क की सरकार' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी वित्तीय कमजोरियों को दूर करने और खर्चों में कटौती करने के बजाय आम जनता, पर्यटन कारोबारियों और छोटे व्यवसायियों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में पहले टॉयलेट टैक्स को लेकर विवाद हुआ, फिर पर्यटकों के वाहनों पर टैक्स लगाने, स्कूल-कॉलेज की फीस बढ़ाने और आवश्यक सेवाओं के शुल्क में बढ़ोतरी जैसे फैसले सामने आए। अब होटल कारोबारियों पर बढ़े हुए शुल्क का बोझ डाल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का प्रशासनिक मॉडल राजस्व जुटाने के लिए नए-नए शुल्क लगाने तक सीमित होता जा रहा है।

छोटे होटल संचालकों पर कितना बढ़ेगा बोझ?

नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संशोधित शुल्क ढांचे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसका सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम होटल कारोबारियों पर पड़ेगा। आंकड़ों के मुताबिक, 10 से 13 कमरों वाले ग्रीन श्रेणी के छोटे होटलों के लिए पांच साल का संचालन सहमति शुल्क 72 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये किए जाने का दावा किया गया है। यानी होटल संचालकों को पांच साल के लिए अब 1.08 लाख रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।

 

शुल्क में बदलाव का असर इस तरह समझा जा सकता है-

  • पुराना पांच वर्षीय शुल्क: 72,000 रुपये
  • नया पांच वर्षीय शुल्क: 1,80,000 रुपये
  • अतिरिक्त वित्तीय बोझ: 1,08,000 रुपये
  • वार्षिक शुल्क: 14,400 रुपये से बढ़कर 36,000 रुपये

पांच साल का शुल्क ढाई गुना हो गया है, जबकि वृद्धि की दर 150 प्रतिशत बैठती है। वहीं, 20 से अधिक कमरों वाले ऑरेंज श्रेणी के होटलों का पांच साल का संभावित शुल्क 3 लाख से 5 लाख रुपये तक पहुंचने की बात भी विज्ञप्ति में कही गई है। संशोधित शुल्क ढांचे को कंसेंट टू एस्टेब्लिश (सीटीई) और कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। जयराम ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि शुल्क जमा नहीं करने वाले पुराने होटल संचालकों को होटल बंद करने तक के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। हालांकि, शुल्क की वास्तविक दरें, श्रेणीवार लागू प्रावधान और नोटिस की स्थिति संबंधित आधिकारिक आदेशों से अलग से सत्यापित किया जाना जरूरी है।

 

यह भी पढ़ें: दिल्ली से शिमला-धर्मशाला का हवाई सफर फिर शुरू, जानें किस समय मिलेगी फ्लाइट

क्या छोटे होटल भी बड़े उद्योगों की श्रेणी में तौले जाएंगे?

जयराम ठाकुर ने कहा कि सीमित संसाधनों में होटल चलाने वाले छोटे और मध्यम व्यवसायियों के लिए इस तरह की शुल्क वृद्धि असहनीय साबित हो सकती है। उनका तर्क है कि पर्यटन प्रतिष्ठानों की तुलना बड़े औद्योगिक निर्माण संस्थानों से करना उचित नहीं है, क्योंकि दोनों की आर्थिक क्षमता, प्रदूषण का स्वरूप और कारोबारी परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की अहम भूमिका है।

प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग होटल, होमस्टे, ढाबों और अन्य पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में कारोबार की लागत बढ़ने से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े छोटे उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है, जिनका असर सीधे कारोबारियों की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्व संबंधी कार्यों के लिए तहसीलों में लगने वाले शुल्कों में बढ़ोतरी से भी आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

सरकार से फैसला वापस लेने की मांग, विरोध की चेतावनी

जयराम ठाकुर ने सरकार से होटल संचालकों पर बढ़ाए गए शुल्क के फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पर्यटन कारोबारियों को राहत देने के लिए शुल्क ढांचे की समीक्षा की जानी चाहिए और छोटे होटल संचालकों के लिए व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा पर्यटन व्यवसाय और आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाले फैसलों का विरोध करेगी। जरूरत पड़ने पर पार्टी सड़क से लेकर हर मंच तक इस मुद्दे को उठाएगी। हालांकि, शुल्क वृद्धि को लेकर सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। शुल्क संशोधन के पीछे के आधार, अलग-अलग होटल श्रेणियों पर लागू दरों और पर्यावरणीय अनुपालन से जुड़ी दलीलों के सामने आने के बाद ही इस फैसले के व्यापक प्रभाव की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

 

यह भी पढ़ें: कर्मचारियों के एरियर पर हाई कोर्ट ने हिमाचल सरकार को दिया 6 हफ्ते का अल्टीमेटम 

दिल्ली रैली पर भी जयराम का निशाना, बोले- मुख्यमंत्री को बोलने का मौका तक नहीं मिला

 

होटल कारोबारियों के मुद्दे के साथ ही जयराम ठाकुर ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर रामलीला मैदान में आयोजित चुनाव आयोग के खिलाफ रैली को लेकर भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने रैली को फ्लॉप बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू मंत्रिमंडल के सदस्यों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली पहुंचे, लेकिन वहां अपेक्षित राजनीतिक प्रभाव नजर नहीं आया।

जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी की 'रीलॉन्चिंग' के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के संसाधनों का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्हें मंच से बोलने तक का अवसर नहीं मिला। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री की कांग्रेस हाईकमान में स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व उन्हें अपेक्षित अहमियत नहीं देता। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि रैली में जुटी भीड़ और उसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर कांग्रेस के दावों पर सवाल खड़े होते हैं।

4 नवंबर को मंडी में पदयात्रा, कार्यकर्ताओं को जुटने का आह्वान

जयराम ठाकुर ने 4 नवंबर को मंडी में प्रस्तावित 'अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा में पार्टी कार्यकर्ताओं से भाग लेने का आग्रह किया। इससे पहले वह दोपहर बाद अपने सराज विधानसभा क्षेत्र के ग्राम केंद्र शंकर देहरा के अंतर्गत सनोई और काण्डीधार बूथ की संयुक्त बैठक में शामिल हुए। बैठक में संगठन के विस्तार, बूथ स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करने और आगामी रणनीति पर चर्चा की गई। इस दौरान विस्तारक जितेन्द्र ठाकुर, ग्राम केंद्र प्रभारी विनय सहित ग्राम केंद्र शंकर देहरा के कार्यकर्ता मौजूद रहे। जयराम ठाकुर ने कार्यकर्ताओं से आगामी कार्यक्रमों के लिए सक्रिय भूमिका निभाने और संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने का आह्वान किया।