जब भी हम थ्रिलर कहानी की बात करते हैं तो हमारे मन में कई तरह क्राइम, जासूसी या फिर किसी रहस्य के आसपास घूमती हुई कहानी आती है। बैंकिंग जैसे सेक्टर को लेकर कोई थ्रिलर कहानी शायद ही किसी ने पढ़ी हो लेकिन अंशुमन भारद्वाज ने एक ऐसी किताब लिखी है जो एक रोमांचक वित्तीय थ्रिलर है। वह बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और उन्होंने अपने इन्हीं अनुभवों के आधार पर 'Approved Rs 590 Crores' वित्तीय थ्रिलर लिखा है। खबरगांव ने उनसे इस किताब को लेकर बातचीत की जिसमें उन्होंने विस्तार से किताब के बारे में बताया।
फाइनेंस की दुनिया को समझना काफी उलझनों से भरा होता है लेकिन उनकी 'Approved Rs 590 Crores'किताब एक लिटरेरी थ्रिलर है, जो पाठकों को फाइनेंस की दुनया के रहस्यमय गलियारों में ले जाती है। उनकी यह कहानी सिर्फ फिक्शन नहीं है बल्कि सच्ची घटनाओं पर आधारित है जिसे एक फिक्शन के रूप में गढ़ा गया है। इस किताब में बैंकिंग जगत की जटिलताओं, मानवीय महत्वकांक्षाओं और उनमें छिपी हुई साजिशों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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कौन हैं इस किताब के लेखक?
इस किताब के लेखक अंशुमन भारद्वाज हैं। उन्होंने लंबे समय तक बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की है और नौकरी छोड़ने के बाद अब वह लेखन का काम कर रहे हैं। उन्होंने बैंकिंग सेक्टर में काम करने के दौरान अपने अनुभवों को साहित्यिक रूप दिया है और उनकी किताब एक अनोखी लिटरेरी थ्रिलर है। उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि भारत में फाइनेंस थ्रिलर लेखन शैली को एक नई पहचान मिले। उन्होंने बताया कि भारत में फाइनेंस थ्रिलर पर अभी तक बहुत कम काम हुआ है, जबकि विदेशों में इन शैली में पहले ही बहुत काम हो चुका है। उनका कहना है कि वे इस शैली में काम करना चाहते हैं और यह उनकी पहली किताब है। उनकी इस किताब को पाठक Amazon और Flipkart दोनों जगहों से ऑर्डर कर सकते हैं।
कौन पढ़ सकता है यह किताब?
यह किताब सिर्फ बैंकिंग सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए नहीं है बल्कि आम पाठकों के लिए भी है। इस किताब में वित्तीय जगत की जटिलताओं को दिखाया गया है इसके साथ ही इसमें मानवीय भावनाएं, संघर्ष और फैसलों को भी गहराई से समझाया गया है। पाठक इस किताब को पढ़ते हुए एक कहानी की तरह पढ़ सकते हैं और पढ़ते समय खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करेंगे। इस किताब को पढ़ने के बाद पाठकों को यह समझ आएगा की बड़े वित्तीय फैसलों के पीछे कितनी जिम्मेदारी और जोखिम छिपा होता है। इसके साथ ही यह किताब उन्हें रोमांच और सस्पेंस से भरपूर अनुभव देगी।
किताब की खासियत?
इस किताब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस किताब में फाइनेंस और बैंकिंग सिस्टम के संघर्षों को आसान भाषा में समझाया गया है। इस किताब को आम पाठक जिसे फाइनेंस सेक्टर की कम समझ है वह भी आसानी से पढ़ सकता है और समझ सकता है। इस किताब को पढ़ने के बाद लोगों ने बताया कि इस किताब को छोटे-छोटे चैप्टर में रखा गया है जिसके कारण इसे आसानी से पढ़ा जा सकता है। इस कहानी को पढ़ते हुए पाठक खुद को कहानी से जुड़ा हुआ महसूस करता है। छोटे-छोटे 17 चैप्टर में यह पूरी किताब और एक कहानी की तरह हर चैप्टर रोमांच से भरा हुआ है।
यह कहानी इस बात के इर्द-गिर्द घूमती है कि कैसे सरकारी बैंक खातों से 590 करोड़ रुपये चुपचाप गायब हो गए। हरियाणा में हाल ही में इसी तरह का एक बैंक फ्रॉड भी सामने आया था। कहानी में दिखाया गया है कि सबसे बड़े घोटाले तिजोरी तोड़कर या डिजिटल साइबर-चोरी से नहीं, बल्कि इसमें दिखाया गया है कि किस तरह बैंकिंग की प्रक्रियाओं और नियमों का सही तरीके से इस्तेमाल करके ही बड़ा वित्तीय घोटाला किया जा सकता है। इस कहानी में मुख्य सवाल यह है कि जब सारी प्रक्रिया का पालन किया गया, सारे दस्तावेज तैयार किए गए तो 590 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ कैसे?
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फाइनेंस थ्रिलर में काम करने का प्लान
लेखक का कहना है कि नालंदा विश्ववद्यालय के समय भारत शिक्षा में दुनिया में सबसे आगे था लेकिन आज भारत में लिखी जाने वाली किताबों की संख्या अन्य देशों की तुलना में कम है। इस मामले में भारत आज 10वें नंबर पर है। लेखक का कहना है कि वह चाहते हैं कि उनकी यह किताब ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंचे और इसके माध्यम से वित्तीय थ्रिलर शैली को भारत में एक नई पहचान मिले।
उन्होंने कहा कि वह भारत को शिक्षा, साहित्य और ज्ञान के माध्यम से फिर से विश्वगुरु बनाना चाहते हैं। बैंकिंग सेक्टर में करीब दो दशकों तक नौकरी करने के बाद उन्होंने यह पहली किताब लिखी है। उन्होंने बताया कि वह आगे भी इस शैली में किताब लिखने की दिशा में काम कर रहे हैं।
