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क्या एक्सरसाइज से डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है?

एक्सरसाइज करना से शरीर ही नहीं दिमाग भी स्वस्थ रहता है। क्या आप जानते हैं एक्सरसाइज करने से डिमेंशिया का खतरा कम हो सकता है?

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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एक्सरसाइज करने से दिल, मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं लेकिन हाल ही में एक रिसर्च हुई है जिसमें पता चला है कि यह दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद है। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक स्टडी पब्लिश की है। इस स्टडी में पाया गया कि रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करने से दिमाग का नैचुरल वेस्ट क्लियरेंस सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है जिसकी वजह से दिमाग की कोशिकाएं स्वस्थ रहती है।

 

दिल्ली के बत्रा अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर बिप्लब दास ने ग्लिंफैटिक सिस्टम के बारे में बताया। यह एक ऐसा सिस्टम है जो दिमाग से मेटाबॉलिक वेस्ट प्रोडक्ट्स को हटाने का काम करता है। उन्होंने बताया कि दिमाग बहुत ऐक्टिव रहता है और काम करने के दौरान वेस्ट प्रोडक्ट बनाता है। ग्लिंफैटिक सिस्टम एक खास तरीके का सिस्टम है जो मुख्य रूप से नींद के दौरान काम करता है। आपकी उम्र जैसे जैसे बढ़ती है दिमाग को स्वस्थ बनाए रखने वाली प्रकियाएं कम असरदार हो सकती हैं। इस वजह से डिमेंशिया का खतरा होता है। डिमेंशिया कोई बीमारी नहीं है। यह लक्षणों का समूह है जो याददाशत, सोचने समझने की क्षमता को प्रभावित करता है।

 

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क्या होता है ग्लिंफैटिक सिस्टम?

ग्लिंफैटिक सिस्टम कोई पाइप या ऑर्गन नहीं है। यह तरल पदार्थ से भरी जगहों का एक नेटवर्क है जो दिमाग के ब्लड वेस्ल्स के साथ काम करता है। सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) इन जगहों से होकर निकलता है और दिमाग के बेकार सेल्स को बाहर निकालने में मदद करता है। दिमाग में एस्ट्रोसाइट्स नाम का स्पेशल सेल होता है जो इस तरल पदार्थ को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसमें शामिल प्रोटीनों मं से एक एक्वापोरिन 4 है जो एक चैनल की तरह काम करता है और पानी को इन कोशिकाओं से होकर गुजरने देता है। यह प्रक्रिया इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दिमाग लगातार काम करता है और इसके लिए एनर्जी चाहिए।

 

स्टडी में इस बात पर ध्यान दिया गया कि ग्लिंफैटिक सिस्टम अमाइलॉइड बीटा और दूसरे ऐसे प्रोटीन को हाटाने में मदद करता है जो दिमाग की कुछ बीमारियों में जमा हो सकते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि खराब ग्लिंफैटिक फंक्शन की वजह से डिमेंशिया होता है। दिमाग के बूढ़े होने और न्यूरोडीजेनरेटिव बीमारियों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं शामिल होती हैं।

नींद क्यों जरूरी है?

इस स्टडी में नींद को जरूरी माना गया है। स्टडी में पाया गया कि जब हम गहरी नींद में सोते हैं तब दिमाग रिपेयर मोड में होता है। यह एक ऐक्टिव बायोलॉजिकल प्रक्रिया है। अगर आपकी बार- बार नींद टूटती है तो इस प्रकिया में रुकावट आती है। इसी वजह से दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए एक अच्छी नींद की जरूरत होती है।

 

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एक्सरसाइज कैसे मदद करता है?

एक्सरसाइज करने से वेस्ट क्लियेरेंस सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। फिजिकल ऐक्टिविटी आपके ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करती है जिससे ब्लड वेसल्स स्वस्थ रहते हैं। 

एक्सरसाइज के दौरान ब्लड प्रेशर और वेसल्स में खून का बहाव भी बदलता है चूंकि दिमाग में फ्लयूड-क्लियरेंस के रास्ते ब्लड वेसल्स से गहराई से जुड़े होते हैं, इसलिए ये बदलाव दिमाग में फ्लयूड को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

 

एक्सरसाइज करने से सूजन कम होती है और नींद बेहतर आती है। ये सभी चीजें नेचुरल वेस्ट क्लियेरेंस को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। एक्सरसाइज सिर्फ एक सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद नहीं करता है बल्कि सर्कुलेशन, ब्लड वेसल्स, सूजन, नींद और दिमाग की कार्यक्षमता को बेहतर करता है।

क्या कोई एक एक्सरसाइज करना दिमाग के लिए फायदेमंद है

शोधकर्ताओं का कहना है कि कौन सी एक्सरसाइज दिमाग के लिए कितनी फायदेमंद है? अभी इस पर शोध करने की जरूरत है। एक्सरसाइज का मतलब सिर्फ वर्कआउट करना नहीं है। इसमें वॉकिं, स्विमिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और अन्य चीजें शामिल है। रोजाना एक्सरसाइज करना सेहत के लिए फायदेमंद है। इससे आप गंभीर बीमारी के खतरे को कम कर सकते हैं।


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