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जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज कैसे बढ़ा रही इनफर्टिलिटी का खतरा? डॉक्टर से समझें

हमारे खानपान और लाइफस्टाइल का प्रभाव फर्टिलिटी पर भी पड़त है। क्या आप जानते हैं कि अधिक एक्सरसाइज करने से भी इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ता है?

extreme exercise cause infertility

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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आजकल फिटनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है और कई लोग मैराथन, हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट, क्रॉसफिट और घंटों जिम ट्रेनिंग जैसे कठिन व्यायाम कार्यक्रमों का हिस्सा बन रहे हैं। नियमित व्यायाम स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता दोनों के लिए फायदेमंद है, लेकिन जब ट्रेनिंग शरीर की सहनशक्ति से अधिक हो जाए, तो इसका असर पुरुषों और महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ सकता है। इस बारे में मने चंडीगढ़ क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ अस्पताल की स्त्री विशेषज्ञ और फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉक्टर कांची खुराना से बात की।

 

महिलाओं में प्रभाव- अत्यधिक व्यायाम करने से शरीर में ऊर्जा की कमी (Energy Deficit) हो सकती है। जब शरीर को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती, तो वह प्रजनन से जुड़े हार्मोनों का उत्पादन कम कर देता है। इससे मासिक धर्म अनियमित हो सकता है या पूरी तरह बंद भी हो सकता है, जिसे अमेनोरिया (Amenorrhea) कहा जाता है। ऐसे में अंडोत्सर्जन (Ovulation) प्रभावित होता है और गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है।

 

पुरुषों में प्रभाव- बहुत अधिक और लगातार कठिन व्यायाम करने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। इससे शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गुणवत्ता और गतिशीलता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक अत्यधिक सहनशक्ति वाले खेल, जैसे अल्ट्रा-मैराथन या अत्यधिक साइक्लिंग, कुछ पुरुषों में प्रजनन क्षमता को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

 

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फर्टिलिटी से जुड़े मिथक बनाम तथ्य

मिथक 1: जितना ज्यादा व्यायाम, उतनी बेहतर फर्टिलिटी
तथ्य: संतुलित व्यायाम फर्टिलिटी को बेहतर बनाता है, लेकिन अत्यधिक ट्रेनिंग इसके विपरीत प्रभाव डाल सकती है।

 

मिथक 2: केवल महिलाओं की फर्टिलिटी पर असर पड़ता है
तथ्य: पुरुषों में भी अत्यधिक ट्रेनिंग हार्मोन संतुलन और शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

 

मिथक 3: एथलीट कभी बांझपन का सामना नहीं करते
तथ्य: पेशेवर एथलीटों में भी ओवरट्रेनिंग, पोषण की कमी और हार्मोनल असंतुलन के कारण प्रजनन संबंधी समस्याएं देखी जा सकती हैं।

 

मिथक 4: फिट शरीर का मतलब हमेशा स्वस्थ प्रजनन क्षमता
तथ्य: बाहरी रूप से फिट दिखने वाला व्यक्ति भी हार्मोनल असंतुलन या फर्टिलिटी संबंधी चुनौतियों का सामना कर सकता है। स्वस्थ संतुलन है सबसे जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, हफ्ते में लगभग 150–300 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम अधिकांश लोगों के लिए पर्याप्त होता है। यदि आप गर्भधारण की योजना बना रहे हैं और अत्यधिक ट्रेनिंग करते हैं, तो पर्याप्त पोषण, आराम और रिकवरी पर ध्यान देना जरूरी है।

 

महिलाओं में होने वाली दिक्कत:


मासिक धर्म अनियमित हो सकता है।
ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्जन) प्रभावित हो सकता है।
कुछ मामलों में पीरियड्स बंद भी हो सकते हैं।
गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है।

 

पुरुषों को होने वाली परेशानी:

 

टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है।
शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अत्यधिक थकान और तनाव से प्रजनन क्षमता अस्थायी रूप से कम हो सकती है।

 

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पुरुष या महिलाओं में किसकी फर्टिलिटी पर ज्यादा असर पड़ता है?

 

असर दोनों पर पड़ सकता है, लेकिन महिलाओं में इसके संकेत अक्सर जल्दी दिखाई देते हैं क्योंकि मासिक धर्म और ओव्यूलेशन सीधे प्रभावित हो सकते हैं। पुरुषों में भी अत्यधिक ट्रेनिंग से शुक्राणुओं की गुणवत्ता और हार्मोन स्तर प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन इसके लक्षण तुरंत स्पष्ट नहीं होते। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि केवल महिलाओं की फर्टिलिटी प्रभावित होती है।

फर्टिलिटी को बेहतर करने के लिए क्या करें?

  • हफ्ते में 150–300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज करें।
  • शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त कैलोरी और पोषण लें।
  • प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, जिंक और ओमेगा-3 युक्त भोजन शामिल करें।
  • पर्याप्त नींद (7–9 घंटे) लें।
  • तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग, ध्यान या रिलैक्सेशन तकनीकों का सहारा लें।
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
  • यदि पीरियड्स अनियमित हो जाएं या गर्भधारण में परेशानी हो रही हो, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लें।

फिट रहने के लिए व्यायाम जरूरी है, लेकिन ज्यादा हमेशा बेहतर होता है यह सोच सही नहीं है। फर्टिलिटी के लिए संतुलित व्यायाम, सही पोषण और पर्याप्त आराम सबसे महत्वपूर्ण है।


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