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एनीमिया में नई उम्मीद, आयरनऑक्स ट्रायल में असरदार, साइड इफेक्ट्स कम

बोटेनिक हेल्थकेयर के नए लिपोसोल आयरन सप्लीमेंट 'आयरनऑक्स' (IRONNOX®) के 56 दिनों के क्लिनिकल ट्रायल में एनीमिया को दूर करने और हीमोग्लोबिन लेवल सुधारने में बेहतरीन परिणाम दिखे हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Grok Generated

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हैदराबाद की प्रमुख न्यूट्रास्युटिकल कंपनी 'बोटेनिक हेल्थकेयर' ने अपने नए लिपोसोल आयरन प्रोडक्ट 'आयरनऑक्स' (IRONNOX®) के सफल क्लिनिकल ट्रायल की घोषणा की है। एनीमिया से जूझ रही 60 महिलाओं पर 56 दिनों तक एक अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि सामान्य आयरन सप्लीमेंट की तुलना में यह नया फॉर्मूला शरीर में आयरन का लेवल तेजी से सुधार रहा है। साथ ही इसके साइड इफेक्ट्स भी न के बराबर हैं।

 

अध्ययन के नतीजों के अनुसार, 56वें दिन तक आयरनऑक्स लेने वाली महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 7.2% अधिक पाया गया। इसके साथ सिरम फेरिटिन में 41.8% और ट्रांसफरिन सैचुरेशन में 18.8% की बढ़त दर्ज की गई। सबसे खास बात यह रही कि सामान्य आयरन गोलियां खाने से 20% महिलाओं को पेट दर्द या कब्ज जैसी परेशानियां हुईं। वहीं आयरनऑक्स का इस्तेमाल करने वाली किसी भी महिला को पेट से जुड़ी कोई समस्या नहीं हुई। साथ ही, मरीजों की थकान में भी 18% तक की कमी देखी गई।

 

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ट्रायल का रिजल्ट और फायदा

इन-विट्रो लैब टेस्ट से पता चला कि लिपोसोल तकनीक के कारण यह नया फॉर्मूला सामान्य आयरन के मुकाबले शरीर में 2.1 गुना अधिक तेजी से घुला। साथ ही इसके शरीर में अवशोषित होने की क्षमता भी बेहतर रही। परंपरागत आयरन सप्लीमेंट्स के उलट इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं निकला। जैसे इस दवा को खाने के बाद पेट में मरोड़, गैस या उल्टी जैसी कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई। शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन में तेजी से सुधार होने के कारण महिलाओं में रोजाना होने वाली थकान में तेजी से कमी आई।


आपको बता दें कि लिपोसोल तकनीक कैसे काम करता है? लिपोसोल बहुत छोटे गोलाकार बुलबुले या वेसिकल होते हैं। ये फॉस्फोलिपिड्स की एक डबल लेयर से बने होते हैं। फॉस्फोलिपिड्स से हमारे शरीर के सेल की बाहरी लेयर यानी सेल मेम्ब्रेन बनी होती है। इसके भीतर विटामिन, मिनरल या अन्य ऐक्टिव तत्वों को सुरक्षित रूप से पैक यानी की एनकैप्सुलेट कर दिया जाता है। 

 

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कंपनी और एक्सपर्ट की राय

बोटेनिक हेल्थकेयर के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर  गौरव सोनी ने बताया कि आयरन सप्लीमेंट लेते समय मरीजों को असर और सहनशक्ति के बीच समझौता नहीं करना चाहिए। यह नई डिलीवरी तकनीक बिना पेट खराब किए आयरन का स्तर बढ़ाने में पूरी तरह सक्षम है। कंपनी के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी (CSO) डॉ. शिव और डॉ. श्रावणी के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च ने साबित किया है कि पेट के अंदर आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए लिपोसोल तकनीक काफी कारगर है। 'आयरनऑक्स' को कंपनी की पेटेंट-फाइल पेटेंटेड 'DFS टेक्नोलॉजी' और 'LipsoBio®' प्लेटफॉर्म के तहत तैयार किया गया है। यह शरीर में न्यूट्रिशन को सुरक्षित और असरदार तरीके से पहुंचाने का काम करता है।


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