logo

मूड

ट्रेंडिंग:

अल फलाह के मालिक ने कैसे दिल्ली में कब्जाई 46 करोड़ की जमीन? ED ने कसा शिकंजा

ईडी ने बुधवार को दिल्ली में 46 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन के फर्जी अधिग्रहण से जुड़े धनशोधन के केस में अल-फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

Al Falah founder property

अल-फलाह विश्वविद्यालय। Photo Credit- PTI

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजधानी दिल्ली में लगभग 46 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन के फर्जी अधिग्रहण से जुड़े धनशोधन के केस में अल-फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी और तीन अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। अल-फलाह विश्वविद्यालय पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद 'सफेदपोश आतंकवाद' के खिलाफ हुई जांच के दायरे में आया था। लाल किले पर हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत हुई थी।

 

ईडी ने बुधवार को जारी एक बयान में बताया कि जवाद सिद्दीकी, उनके द्वारा प्रवर्तित तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन और विनोद कुमार तथा श्रीओम चौहान नाम के दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ साकेत स्थित विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) कोर्ट में अभियोजन शिकायत दायर की गई है। ईडी ने कथित फर्जी भूमि अधिग्रहण मामले में जवाद सिद्दीकी, विनोद कुमार और श्राओम चौहान को गिरफ्तार भी किया था।

 

यह भी पढ़ें: गेमिंग कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हर दांव पर लगेगा 28% GST

एफआईआर के आधार पर जांच शुरू

केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की गई थी। यह एफआईआर दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर में स्थित जमीन के कथित फर्जी अधिग्रहण से संबंधित थीं, जिसमें कथित तौर पर जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज, सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) और अन्य स्वामित्व पत्र इस्तेमाल किए गए थे।

अवैध कब्जा करने की रची साजिश

जांच एजेंसी के अनुसार, जिन जीपीए के आधार पर जमीन तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को सौंपी गई थी, वे 7 जनवरी 2004 की तारीख के थे। हालांकि जांच में पता चला कि कई मूल भूमि मालिकों की मृत्यु 2004 से कई दशक पहले ही हो चुकी थी। एजेंसी ने कहा, 'जांच के दौरान पता चला कि आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य लोगों ने मूल जमीन मालिकों के हस्ताक्षर और अंगूठे के जाली निशान बनाकर जमीन पर अवैध कब्जा करने की साजिश रची।'

फर्जी तरीके से तैयार किए गए जीपीए

ईडी ने कहा कि जांच में यह भी पता चला कि संपत्ति फाउंडेशन के हवाले किए जाने से ठीक पहले 2012-13 में कथित तौर पर फर्जी तरीके से जीपीए तैयार किए गए थे। ईडी ने आरोप लगाया, 'आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी ने अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत करके बैंकिंग लेनदेन का दिखावा किया, ताकि जमीन हड़पने को वैध लेनदेन के रूप में पेश किया जा सके।'

 

यह भी पढ़ें: दिल्ली में पहली बार PM मोदी से मिले तमिलनाडु मुख्यमंत्री विजय

 

एजेंसी का दावा है कि जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण के लिए भारी नकद लेनदेन किए गए और मामले में अपराध से अर्जित आय लगभग 47.76 करोड़ रुपये आंकी गई है। ईडी ने कहा कि उसने लगभग 45.84 करोड़ रुपये मूल्य की उस जमीन को कुर्क किया है, जो कथित रूप से जवाद सिद्दीकी और तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के कब्जे में थी।

 

यह जवाद सिद्दीकी के खिलाफ दूसरा धनशोधन मामला है। पहले मामले में ईडी ने आरोप लगाया था कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये अर्जित किए और छात्रों से एकत्र धन का निजी कामों में इस्तेमाल किया।


और पढ़ें