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महिलाओं के लिए नया रोजगार सेक्टर बन रहा है आयुष, कितना बढ़ा दायरा?

आयुष सेक्टर सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वेलनेस सेंटर, स्पा, योग सेंटर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के मौके बढ़ा रहा है। इसका फायदा महिलाओं को भी मिल रहा है।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

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भारत में आयुष (AYUSH) सेक्टर का विस्तार तेजी से हो रहा है। आयुष सेक्टर में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं। अब यह सेक्टर सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वेलनेस सेंटर, स्पा, योग सेंटर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के मौके बढ़ा रहा है। इसका फायदा महिलाओं को भी मिल रहा है। केंद्र सरकार की 8 अक्टूबर 2026 को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयुष सर्विस सेक्टर हेल्थकेयर, वेलनेस, एजुकेशन और उससे जुड़ी सर्विसेज में 1.76 मिलियन लोगों को रोजी-रोटी देता है। 

 

ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब आयुष सेक्टर का दायरा पारंपरिक इलाज से आगे बढ़ रहा है। अब इसमें वेलनेस सेंटर, शिक्षा, बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए दूसरे देशों से भारत आने वाले मरीजों से जुड़ी सेवाएं भी शामिल हो रही हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आयुष सेक्टर के बढ़ने से आने वाले समय में इलाज, वेलनेस सेंटर, शिक्षा, मेडिकल टूरिज्म, रिसर्च और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में रोजगार के और मौके बन सकते हैं। 

 

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आयुष सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, आयुष सेवा क्षेत्र में कुल काम करने वाले लोगों में 43 फीसदी महिलाएं हैं। वहीं, स्पा और वेलनेस रिसॉर्ट्स में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 60 फीसदी से अधिक है। इसके बाद एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में 58 फीसदी, डे-केयर सेंटर में 57 फीसदी और अस्पतालों में फीसदी हिस्सेदारी है। यानी हॉस्पिटल, डे-केयर सेंटर, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन और वेलनेस से जुड़े संगठित क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा है। 

 

आयुष सेक्टर में 16.91 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी 

आयुष सेक्टर में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में इस सेक्टर का आकार करीब 36.92 अरब डॉलर था। 2022-23 से लेकर 2024-25 के बीच इस सेक्टर में हर साल औसतन 16.91% की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा कमाई क्लीनिक से हुई है। वहीं वेलनेस सेक्टर में हर साल औसतन 21.29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और योग सेंटरों की कमाई दो साल में करीब 75 फीसदी बढ़ी है।

 

आयुष सेक्टर में अलग-अलग चलने वाले क्लीनिक सबसे बड़ा हिस्सा हैं। इनसे करीब 16.21 अरब डॉलर की कमाई होती है और यह इस सेक्टर की कुल कमाई का 43.9 फीसदी है। इसके अलावा, डे-केयर सेंटरों से करीब 10.13 अरब डॉलर की कमाई होती है। इन दोनों को मिलाकर सेक्टर की कुल कमाई का 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आता है। 

 

 

रिपोर्ट के मुताबिक, आयुष की अलग-अलग पद्धतियों में आयुर्वेद सबसे बड़ा क्षेत्र है। 2024- 25 में इससे करीब 17.73 अरब डॉलर की कमाई हुई, जो आयुष सर्विस सेक्टर की कुल कमाई का लगभग 48 फीसदी है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय और अलग-अलग क्लीनिकों से 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। इससे साफ है कि आयुष सेक्टर शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी लोगों की रोजी-रोटी का जरिया है।

विदेशी मरीजों से कमाई

रिपोर्ट के मुताबिक, आयुष से जुड़ी चिकित्सा के लिए दूसरे देशों से भारत आने वाले मरीजों से भी कमाई हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में इस क्षेत्र से करीब 1.77 अरब डॉलर की कमाई हुई। विदेशी मरीजों की संख्या कुल मरीजों का करीब 5 फीसदी है, लेकिन अस्पतालों की कुल कमाई में उनका योगदान 15 से 25 फीसदी तक होने का अनुमान है। ऐसे मरीज आमतौर पर इलाज के लिए पांच से 11 दिन तक रुकते हैं।

 

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2047 तक आयुष सर्विस सेक्टर का आकार बढ़कर 216 अरब डॉलर से 318 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे इलाज, योग, वेलनेस, शिक्षा और दूसरी संबंधित सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। 


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