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दिल्ली SIR में 33 लाख वोटरों को नोटिस, नाम और उम्र की गड़बड़ी सबसे बड़ी वजह

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 33.1 लाख लोगों को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा है। कई लोगों के नाम पुराने वोटर लिस्ट से मैच नहीं हो रहे हैं। पढ़ें रिपोर्ट।

Delhi SIR draft voter list released

वोटर लिस्ट, Photo Credit: ANI

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दिल्ली में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन ( SIR ) के पहले चरण के बाद 31 अगस्त को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आई अनियमितताओं की वजह से करीब 33.1 लाख लोगों को नोटिस मिला है। चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से नोटिस भेजे जाने की सबसे बड़ी वजह यह रही कि उनकी एंट्री पिछले SIR से लिंक नहीं हो पाई। यह वजह कुल नोटिसों में से 42 फीसदी मामलों में सामने आई है।

 

इसके बाद सबसे ज्यादा नोटिस पिछली मतदाता सूची से नाम के मेल न खाने और माता-पिता या बच्चों की उम्र में बहुत ज्यादा या बहुत कम अंतर होने की वजह से जारी किए गए हैं। 59,791 नोटिस ऐसे भी हैं, जिनमें कोई वजह ही नहीं बताई गई है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने लिस्ट अपलोड की है, जिसके विश्लेषण से वजहें पता चली हैं। 

यह भी पढ़ें: केजरीवाल से S जयशंकर तक को SIR का नोटिस, क्या सफाई दे रहा चुनाव आयोग?

किस-किस वजह से मिले सबसे ज्यादा नोटिस?

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कुल 33.1 लाख लोगों को नोटिस मिला है, इनमें से 31.1 लाख, करीब 94 फीसदी लोगों के खिलाफ सिर्फ एक ही वजह दर्ज है। इनमें से 13.8 लाख लोगों को नोटिस इसलिए मिला, क्योंकि उनकी एंट्री पिछले SIR से लिंक नहीं हो सकी। वहीं कुछ लोगों के मामलों में एक से ज्यादा वजहें भी दर्ज हैं। 

करीब 1.28 लाख नोटिसों में दो वजहें बताई गई हैं, करीब 9,000 नोटिसों में तीन वजहें और 400 से ज्यादा नोटिसों में चार वजहें दर्ज हैं। कुछ वजहें एक से ज्यादा बार दर्ज हैं, इसलिए हर वजह की गिनती उतनी ही बार की गई है, जितनी बार वह सामने आई। करीब 41 फीसदी मामलों में नाम के मेल न खाने की समस्या सामने आई है, चाहे नाम अपना हो या माता-पिता का। 

 

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नोटिस देने का पैटर्न क्या रहा है?

'पेरेंट नेम मिसमैच' 24 फीसदी और 'सेल्फ नेम मिसमैच' 17 फीसदी नोटिसों की वजह बना है। उम्र में अंतर की गड़बड़ी की वजह से 16 फीसदी नोटिस जारी हुए हैं। इनमें बच्चे और माता-पिता की उम्र के बीच 9 महीने से कम का फासला, माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा का अंतर और दादा-दादी की उम्र में 40 साल से कम का फासला जैसी वजहें शामिल हैं। करीब 1.4 लाख लोगों यानी 4.2 फीसदी नोटिसों में 6 या उससे ज्यादा बच्चे होने की वजह दर्ज है, जबकि 182 लोगों को इसलिए नोटिस मिला पिछले SIR में उनके माता-पिता अयोग्य पाए गए थे।

नोटिस पाने वालों की औसत उम्र 40 साल

नोटिस पाने वाले व्यक्ति की औसत उम्र 40 साल है। सबसे ज्यादा उम्र वाले 20 फीसदी लोगों की उम्र 54 साल या उससे ज्यादा है, जबकि सबसे ज्यादा उम्र वाले 10 फीसदी लोगों की उम्र 62 साल या उससे ज्यादा है। नोटिस पाने वाले सबसे बुजुर्ग व्यक्ति की उम्र 125 साल है। पुरानी दिल्ली के सदर बाजार विधानसभा क्षेत्र के श्याम मुखीजा को खुद के नाम में मेल न खाने की वजह से नोटिस मिला है। 

 

दिल्ली की आबादी देश के मुकाबले थोड़ी ज्यादा उम्रदराज है। नेशनल कमीशन ऑन पॉपुलेशन के 2026 के अनुमान के मुताबिक, मार्च 2026 में देश की औसत उम्र 30.27 साल रहने की उम्मीद है, जबकि दिल्ली की औसत उम्र 31.91 साल रहने की संभावना है।

 

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किस विधानसभा क्षेत्र में कितने वोटरों को मिला नोटिस?

अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के प्रतिशत में भी काफी अंतर देखने को मिला है। मटिया महल विधानसभा क्षेत्र में ड्राफ्ट सूची में शामिल सिर्फ 22.7 फीसदी लोगों को नोटिस मिला है, जबकि बदरपुर में यह आंकड़ा 44.2 फीसदी तक पहुंच गया है।

लिंग के आधार पर देखें तो ड्राफ्ट सूची में शामिल पुरुषों में से 34.5 फीसदी को नोटिस मिला है, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 33.4 फीसदी है। वहीं ड्राफ्ट सूची में शामिल 447 ट्रांसजेंडर लोगों में से आधे को नोटिस भेजा गया है।


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