नीट-यूजी पेपर लीक 2026 का विरोध अब दिल्ली के जंतर-मंतर से निकलकर हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश आदि जैसे राज्यों में भी तेजी से फैल रहा है। आने वाले समय में यह प्रदर्शन और भी राज्यों में फैलने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में परीक्षाओं में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। इसको लेकर छात्र देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक सूर में इस्तीफा मांग रहे हैं। परीक्षाओं में धांधली को लेकर विभिन्न छात्र संगठन और विपक्षी दल सड़कों पर उतर चुके हैं। इन प्रदर्शनों को देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस राज्यों में लेकर जा रही है।
पेपर लीक मामला अब दिल्ली से राज्यों में पहुंचना कोई छोटी घटना नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में सत्तारुढ़ बीजेपी के लिए खतरा पैदा कर रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पेपर लीक मामला राज्यों में पहुंचने से बीजेपी के लिए कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है...
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छात्रों में छाई नाराजगी
देश में करोड़ों की संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियो में लगे रहते हैं। वह प्रतियोगी परीक्षाओं के आने का इंतजार करते हैं। जब वह परीक्षा देकर रिजल्ट आने का इंतजार करते हैं तो उन्हें नौकरी की उम्मीद होती है। मगर, परीक्षाओं में धांधली या पेपर लीक से तैयारी करने वाले लाखों छात्र सीधे प्रभावित होते हैं।
हाल के वर्षों नीट-यूजी, सीबीएसई ओएमआर शीट धांधली, यूजीसी नेट, भर्ती परीक्षाओं और अन्य परीक्षा विवादों ने युवाओं के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। इन अनियमितताओं की वजह से देश के युवावर्ग में नाराजगी है। सही समय पर फैसला नहीं होने पर यह नाराजगी चुनाव के समय बीजेपी के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
विपक्ष को बड़ा राजनीतिक मुद्दा
विपक्ष लगातार केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर जवाबदेही तय करने का दबाव बना रहा है। साथ ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठा रहा है। दरअसल, जब कोई मुद्दा छात्रों और बेरोजगारी से जुड़ता है तो उसका राजनीतिक असर सामान्य घोटालों से अधिक हो सकता है क्योंकि यह मामला सीधे तौर से युवाओं के भविष्य के साथ जुड़ा होता है। छात्र आदोलनों को राजनीतिक दल अपना समर्थन देकर उनकी आवाज से आवाज मिलाते हैं, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी को चुनावों में भारी नुकसान हो सकता है। इस बार नीट यूजी और सीबीएसई मामले में समूचा विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है।
कहां-कहां हुए प्रदर्शन?
कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आवास के बाहर यूथ कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई। देहरादून में एनएसयूआई सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी और छात्र संगठनों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए प्रदर्शन किया।
इस मुद्दे को लेकर पूरे देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। विपक्ष लगातार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगा रहा है। वहीं, मोदी सरकार और बीजेपी इन मुद्दों पर खामोशी धारण करते हुए जांच करवाने की बात कह रही है।
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आंलोलन राज्यों में फैलने का डर
नीट यूजी पेपर लीक और सीबीएसई विवाद केवल राष्ट्रीय परीक्षाओं तक ही सीमित नहीं रह गया है। यह उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भी फैल रहै है। इसके अलावा इन राज्यों में राज्य स्तर की भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में विपक्ष छात्रों के मुद्दों को लेकर राज्यों में लगातार सक्रिय होकर इसे बीजेपी सरकार की विफलता के रूप में पेश करेगा। इस कदम से बीजेपी को कई राज्यों में झटका लगा सकता है।
बीजेपी की पारंपरिक वोटों पर असर
पिछले 12 सालों में चाहे केंद्र हो या फिर राज्य बीजेपी का एक बड़ा समर्थन आधार युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता रहे हैं। अगर, छात्रों में यह धारणा बनती है कि मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया सुरक्षित नहीं है, तो इससे छात्रों में असंतोष बढ़ सकता है और बीजेपी के खिलाफ नाराजगी बढ़ेगी।