एलन मस्क की नाराजगी के बावजूद अंबानी से मिलने क्यों आए अमेरिकी नेता?
वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने की ताकत जामनगर रिफाइनरी के पास है। यह रिफाइनरी अमेरिका के डीजल संकट को भी दूर कर सकती है।

जामनगर रिफाइनरी पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो। (Photo Credit: X/@USAmbIndia)
अमेरिका के दिग्गज उद्योगपति एलन मस्क ने हाल ही में मुकेश अंबानी को 'ऑलिगार्क' कहकर संबोधित किया। आरोप लगाया कि वह ही भारत के 'असली प्रधानमंत्री' हैं। अंबानी पर भारत में स्टारलिंक की एंट्री रोकने का आरोप भी लगाया। मगर 10 दिन में ही सारा खेल पलट गया। जिस अंबानी के खिलाफ एलन मस्क ने मोर्चो खोला, उन्हीं अंबानी की तेल रिफाइनरी का दौरा करने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहुंचे।
आज ट्रंप प्रशासन अंबानी की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका को अचानक अंबानी की इतनी जरूरत क्यों पड़ी, इसके पीछे कौन से रणनीतिक हित हैं? अंबानी के पास ऐसा क्या है, जो अमेरिका के पास नहीं है। समझते हैं सबकुछ...
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गुजरात के जामनगर में मुकेश अंबानी की तेज रिफाइनरी है। यह दुनिया की सबसे बडी रिफाइनरी है। बुधवार को मुकेश अंबानी के परिवार ने जामनगर रिफाइनरी में मार्को रुबियो का स्वागत किया। विश्लेषकों का कहना है कि रुबियो के दौरे से भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंध और मजबूत होंगे।
वेनेजुएला में फंसा अमेरिका?
निकोलस मादुरो के अपहरण के बाद अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला के तेल को निकालने की मंजूरी मिल गई है। मगर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वेनेजुएला का तेल काफी भारी होता है। यह तेल टार के जैसा गढ़ा होता है। दुनिया की हर रिफाइनरी के पास उसे रिफाइन करने की क्षमता नहीं है। रिलांयस की जामनगर रिफाइनरी इस तेल को रिफाइन कर सकती है।
अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर भले ही कब्जा कर लिया, लेकिन बिना रिफाइन के यह तेल किसी काम नहीं है। अगर रिफाइन करना है तो रियालंस की शरण में आना ही होगा, क्योंकि जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे एडवांस्ड एकल-स्थल रिफाइनरी है। प्रतिदिन 14 लाख बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती है।
अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला से आने वाले देश का शोधन जामनगर में हो, क्योंकि कंपनी के पास पहले से ही वेनेजुएला के तेल को रिफाइन करने का अनुभव है।
भारत आने के बाद एक इंटरव्यू में मार्को रुबियो ने भी खुद कहा कि अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध से आने वाली ऊर्जा के शोधन के मामले में रिलायंस के साथ अधिक निकटता से काम करना चाहता है।
तकनीक का भी मसला
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी को दुनिया का पेट्रोलियम हब कहा जाता है। यहां भारत की कुल खपत का एक तिहाई तेल और वैश्विक क्षमता का 1.6 फीसद हिस्सा रोजाना रिफाइन किया जाता है। मार्को रुबियो भारत को तेल रिफाइन सुपरपावर बता चुके हैं। हालांकि भारत से अधिक तेल रिफाइन करने की क्षमता चीन, अमेरिका और रूस के पास है। मगर इन देशों के पास इतनी एडवांस्ड रिफाइनरियां नहीं है, जो वेनेजुएला के तेल को रिफाइन कर सके। अगर रिफाइन करती भी हैं तो अधिक समय और लागत खर्च होगी।
मध्यावधि चुनाव भी वजह
अमेरिका में अगले महीने मध्यावधि चुनाव हैं। ईरान युद्ध के कारण डीजल की कीमतें अमेरिका में सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को बड़ा खामियाजा भी उठाना पड़ सकता है। इससे बचने की खातिर ही इसी महीने ट्रंप ने रूस के साथ डीजल समझौता किया। अब उनके विदेश मंत्री ने भारत का रुख किया, ताकि डीजल खरीद आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा सके। यही कारण है कि हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने भारत को टैरिफ से भी राहत दी है।
अंबानी के पास अमेरिका के दर्द का कैप्सूल
अमेरिका में सबसे बड़ा संकट डीजल का है। रिलांयस सबसे अधिक डीजल ही बेचता है। मतलब ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी समस्या का समाधान अंबानी के पास है। यही कारण है कि मार्को रुबियो को अचानक अंबानी की शरण में उस वक्त आना पड़ा, जब ट्रंप के सबसे करीबी एलन मस्क सार्वजनिक मंच से मुकेश अंबानी को निशाना बनाने में जुटे हैं।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की पहली छमाही में रिलायंस ने जामनगर से 21.66 मिलियन टन रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट का निर्यात किया। इसमें सबसे अधिक 9.81 मिलियन टन डीजल का हिस्सा था। कुल निर्यात का 28% हिस्सा अकेले यूरोप को भेजा गया।
मेक इन अमेरिका का भी मामला
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका के टेक्सास में एक रिफाइनरी लगाएगी। इसका एलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ महीने पहले ही किया था। इस रिफाइनरी की क्षमता रोजाना 1.68 लाख बैरल तेल की होगी।
प्लान के मुताबिक यहां अमेरिका में उत्पादित तेल को रिफाइन किया जाएगा। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी प्रस्तावित है। अगर परियोजना परवान चढ़ती है तो यह पांच दशक में अमेरिकी की पहली बड़ी रिफाइनरी प्रोजेक्ट होगा।
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जामनगर रिफाइनरी और रिलायंस की असली ताकत
जामनगर रिफाइनरी के पास भारी सल्फर युक्त कच्चे तेल के शोधन की क्षमता है, जबकि दुनिया की कई अन्य रिफाइनरियों के पास यह तकनीक नहीं है। यह प्लांट कच्चे तेल को उच्च मूल्य वाले पेट्रोलियम पदार्थों में बदलने की ताकत रखता है।
दुनिया की कोई रिफाइनरी 216 से ज्यादा ग्रेड वाले कच्चे तेल का शोधन नहीं कर सकती है। मगर रिलायंस ने यह कारनामा पिछले महीने ही करके दिखाया है।
अगर रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी नहीं होती तो दुनियाभर के तेल बाजार में उथल-पुथल मच तय था। आज यह रिफाइनरी दुनियाभर को पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई करने वाले वाले बड़े संयंत्रों में से एक है। इससे तेल बाजार में स्थिरता बनी है।
यूरोप का पूरा तेल बाजार रिलायंस पर ही टिका है। सितंबर में महीने में यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट ले जाने वाले सात बड़े मालवाहक जहाजों में से छह का नाता रिलायंस से था। इससे आप रिलांयस पर यूरोप की निर्भरता का अंदाजा लगा सकते हैं।
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