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हरियाणा: निजीकरण के विरोध में 22 अक्टूबर से भूख हड़ताल करेंगे बिजली कर्मचारी

हरियाणा में निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली निगम कर्मचारी 22 अक्टूबर से हड़ताल करने जा रहे हैं। अभी तक ये कर्मचारी कई बार पुतला भी जला चुके हैं।

सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते बिजली कर्मचारी

सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते बिजली कर्मचारी, Photo Credit - खबरगांव

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हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का काम निजी कंपनी को सौंपने के फैसले के खिलाफ पूरे हरियाणा में बिजली निगम कर्मियों विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को इस संबध में पूरे हरियाणा के बिजली निगमों में बिजली निगम कर्मचारी इकट्ठे हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सरकार का पुतला भी फूंका गया। अब येकर्मचारी 22 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठने जा रहे हैं।

 

बिजली निगम कर्मचारियों ने 25 साल के लिए समानांतर लाइसेंस दिए जाने के इस फैसले को 'कर्मचारी-विरोधी' और 'जन-विरोधी' करार दिया है। सरकार के इस फैसले के विरूद्ध मंगलवार को कर्मचारियों ने 2 घंटे प्रदर्शन किया। वहीं, 22 से 24 अक्टूबर तक 3 दिवसीय पूर्ण हड़ताल का शेड्यूल जारी किया है। इसके साथ ही बुधवार को दो घंटे की गेट मीटिंग भी की जाएगी। बुधवार को बिजली निगम कर्मचारी इस संबंध में फैसले की प्रतिलिपियां जलाएंगे।

 

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दो घंटे प्रदर्शन कर फूंके पुतले

हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को अधीक्षक अभियंता कार्यालय अंबाला शहर में भी बिजली कर्मचारी इकट्ठा हुए। यहां उन्होंने सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक प्रदर्शन करने के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सैनी और हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलर कमीशन के अध्यक्ष मुकेश गर्ग का पुतला फूंका। मंगलवार को अंबाला में प्रदर्शन की अध्यक्षता एसबीसी यूनियन के महासचिव राजेश चंद्र सिरोही ने की और मंच का संचालन HSEB वर्कर यूनियन के सर्कल सचिव सतबीर देशवाल ने किया। संयुक्त संघर्ष मोर्चे की करनाल में सोमवार को इस संबंध में बैठक भी हुई थी।

 

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कर्मचारी बोले- 'वादे से मुकर रही सरकार'

मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने कहा कि हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों से वायदाखिलाफी करते हुए HERC कंपनी को गुरुग्राम और नूह सर्कल में बिजली वितरण के लिए पैरेलल लाइसेंस दे दिया है। हरियाणा पावर इंजीनियर हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संघर्ष मोर्चा इस फैसले का पुरजोर विरोध करता है। महासचिव राजेश चंद्र सिरोही ने कहा कि पता चला है कि करनाल, पानीपत, फरीदाबाद, सोनीपत, पलवल में भी सरकार इसी तरह बिजली का निजीकरण करने जा रही है।

 

कर्मचारियों ने कहा कि हरियाणा सरकार कर्मचारियों से 2 महीने पहले किए वादे से मुकर रही है। पैरेलल लाइसेंस को रद्द करना, स्मार्ट मीटर प्रणाली को रद्द करना और एग्री डिस्कॉम को न बनाने के वादों पर सरकार और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों की सहमति बनी थी। इसके बाद यूनियन ने हड़ताल स्थागित कर दी थी, लेकिन कर्मचारियों की जायज मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई न करते हुए हरियाणा सरकार ने वादा खिलाफी की।

 

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रात 10 बजे से हड़ताल शुरू

कर्मचारियों ने ऐलान किया कि 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से पूरे प्रदेश के सभी करीब 24 हजार बिजली निगम कर्मचारी 24 अक्टूबर तक हड़ताल पर चले गए हैं। किसी भी प्रकार की इमरजेंसी सेवाओं में भी सहयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अपना बंदोबस्त खुद कर ले। उन्होंने बिजली निगम के सभी कर्मचारियों से आह्वान किया है कि तीन दिवसीय हड़ताल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। अंबाला सर्कल में हुए विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से सर्व कर्मचारी संघ के राज्य कमेटी से मलकीत सिंह, HSEB वर्कर यूनियन की राज्य कमेटी से राजकुमार सेहला, ऑल हरियाणा पॉवर कॉरपोरेशन से सर्कल सचिव विकास व अन्य मौजूद रहे।

बिजली मंत्री ने जारी किया बयान

मामले में हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने बयान जारी कर कहा है कि ये फैसला स्वायत्त बॉडी का आया है। उसकी हम अपील करेंगे। हमने वहां भी मजबूती के साथ निजीकरण का विरोध किया था, पर उसका फैसला आया है तो विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करने के लिए विभाग को तैयारी करने के लिए कह दिया गया है।

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