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हरियाणा में हर महीने हो रहे 90 हजार से ज्यादा नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन

हरियाणा में सड़कों पर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम, वायु व ध्वनी प्रदूषण जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। इस महीने में ही 94 हजार से ज्यादा नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।

90 thousand new vehicle registrations every month in Haryana

सड़क से गुजरते वाहन। (Photo Credit - खबरगांव।)

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हरियाणा में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर महीने प्रदेश में 90 हजार से ज्यादा वाहनों के रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं। लगातार वाहनों की संख्या बढ़ने से हरियाणा में प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है। लगभग हर मीडिल क्लास वर्ग का परिवार अब कार खरीद रहा है। इसकी कई वजह हैं, लेकिन लगातार सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या से प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, साथ ही शहरों में ट्रैफिक की समस्या भी बढ़ने लगी है। सिग्नल लाइट को क्रॉस करने के समय पहले सिग्नल पर खड़े वाहन एक ही बार में क्रॉस कर जाते थे, लेकिन अब दो से तीन बार में वाहन क्रॉस हो पाते हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने से हादसों की संख्या भी बढ़ी है।

 

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट के डेटा के अनुसार, अगर इस साल की ही बात की जाए तो जनवरी से अब तक दस लाख के करीब वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। पिछले पांच साल की बात करें तो 2022 से अब तक 46 लाख 3 हजार 706 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। हर महीने 90 हजार से ज्यादा वाहनों के रजिस्ट्रेन के चलते संभावित है कि जनवरी 2027 तक करीब 3 लाख नए वाहन सड़कों पर उतर जाएंगे।

वाहनों के रजिस्ट्रेशन से सरकार का रेवेन्यू बढ़ रहा है, लेकिन आमजन के लिए ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में लगातार वाहनों की संख्या बढ़ने से रोड पर पैदल या दोपहिया वाहन चालकों के लिए रास्ता लगभग कम हो चुका है। कई जगह सरकार की तरफ से रोड को चौढ़ा भी किया गया है, लेकिन वाहनों की बढ़ती संख्या से रोड चौढ़ा करने का भी कुछ खास फायदा देखने को नहीं मिल रहा है।

 

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आखिर क्यों बढ़ रही वाहनों की संख्या?

वर्तमान समय में लगभग हर मध्यम वर्गीय परिवार के पास कार है। लगातार कम होते संयुक्त परिवार के चलन से परिवार एकल होते जा रहे हैं। ऐसे में जहां पहले परिवार में एक वाहन होता था, वहां अब एक से ज्यादा वाहन खरीदे जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बैंकों की तरफ से लोन, फायनेंस की सुविधा का भी लाभ मिलने से लोग डाउन पेमेंट देकर वाहन खरीद लेते हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बात करें तो बसों में भीड़ से बचने के लिए भी लोग खुद की कार खरीदना पसंद कर रहे हैं। वहीं लगातार बढ़ते किराये से बचने के लिए भी लोग खुद का वाहन खरीदना ही उचित समझ रहे हैं। इसके साथ ही हाई स्टेट्स दिखाने के लिए व विवाह-शादी के समय भी लोग अक्सर दहेज में कार देना पसंद कर रहे हैं।

 

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गुरुग्राम और फरीदाबाद वाहन रजिस्ट्रेशन की टॉप लिस्ट में

बता दें कि जनवरी 2025 में वाहनों के रजिस्ट्रेशन में 8.53 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज हुई थी। ये ग्रोथ वर्ष 2024 में 19.21 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने के बाद हुई थी। ऐसे में इस साल ग्रोथ 10 प्रतिशत से ज्यादा की होगी। पिछले साल वर्ष 2025 में प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन में फरीदाबाद और गुरुग्राम के एरिया टॉप लिस्ट में हैं। इस साल की ही बात करें तो गुरुग्राम में अब तक 83429 और फरीदाबाद में 41210 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है।

 

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एक महीने में एक लाख से ज्यादा वाहनों का हुआ रजिस्ट्रेशन

बता दें कि इस साल जनवरी से अब तक 949393 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। अकेले अक्टूबर माह में ही अब तक एक लाख 206 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जबकि अभी इस माह के दो दिन शेष हैं। ऐसे में ये संख्या बढ़ सकती है। जनवरी माह में 103662, फरवरी में 87402, मार्च में 93039, अप्रैल में 92299, मई में 91304, जून में 87987, जुलाई में 100168, अगस्त में 92460, सितंबर में 100866 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ।


पिछले पांच साल के वाहनों के रजिस्ट्रेशन की बात करें तो पता चला है कि नए रजिस्टर्ड होने वाले वाहनों में व्यावसायिक वाहनों की संख्या 10 प्रतिशत ही है। यानी पर्सनल व्हीकल की संख्या इससे कहीं अधिक है। बता दें कि वर्ष 2025 में 1081113 वाहनों के रजिस्ट्रेशन हुए। वर्ष 2024 में 996162, वर्ष 2023 में 835626 और वर्ष 2022 में 739412 वाहनों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं।

 

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दिवाली और नए साल पर बिकते हैं ज्यादा वाहन

त्योहारी सीजन चल रहा है। ऐसे में नए वाहन खरीद की संख्या में इजाफा हो जाता है। खासकर दिवाली और नए साल पर लोग सबसे ज्यादा वाहन खरीदते हैं। क्योंकि नए साल पर वाहन की रजिस्ट्रेशन एक साल और बढ़ जाती है। वहीं दिवाली पर वाहनों की खरीद पर अच्छा डिस्काउंट मिल जाता है, क्योंकि वाहन का मॉडल दो महीने बाद एक साल पुराना हो जाता है। ऐसे में लोग डिस्काउंट आॅफर के चलते दिवाली पर भी वाहनों की अधिक खरीदारी करते हैं।

 

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वाहनों की बढ़ती संख्या से ये फायदा और नुकसान

वर्तमान समय में सड़कों पर वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे लोगों को सुविधाएं तो मिल रही है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं। इससे प्रदूषण, जाम और दुर्घटनाओं जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। फायदों की बात करें तो खुद के वाहन से कम समय में लंबी दूरी तय की जा सकती है। इमरजेंसी के समय जब पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं मिल पाती, उस समय खुद का वाहन होने से फायदा मिलता है। कई बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट से कोई सामान भेजने की बजाय खुद के वाहन से सामान लेकर जाना सस्ता पड़ता है। खुद के वाहन को ट्रैक्सी, एंबुलेंस जैसी सुविधाएं देने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।


हालांकि, खुद के वाहन के फायदें तो हैं, लेकिन बढ़ती वाहनों की संख्या से कुछ नुकसान भी हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने से वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। कई शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अक्सर खराब रहता है। वाहनों की बढ़ती संख्या से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। साथ ही ट्रैफिक जाम भी बढ़ रहा है। जिस कारण समय की भी बर्बादी होती है। वहीं इससे सड़क हादसे भी बढ़ने लगे हैं। ज्यादा र्इंधन की भी खपत हो रही है।

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