जब बाजार और बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा पैसा हो तो उम्मीद की जाती है कि ब्याज दरें सस्ती होंगी और कर्ज आसानी से मिलेगा। इसके उलट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक अनोखी दुविधा का सामना कर रहा है। देश के बैंकिंग सिस्टम में करीब 7.3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस कैश जमा है। इसके बावजूद RBI ने रेपो रेट को 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। यह दिखाता है कि RBI ने अपनी नीति को सख्त करने का रुख अपनाया है।
दरअसल, रिजर्व बैंक इस समय दो बड़े खतरों महंगाई और डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार आ रही गिरावट से एक साथ निपट रहा है। बाजार में अगर बहुत ज्यादा कैश चलन में रहेगा तो इससे महंगाई और बेकाबू हो सकती है। यही वजह है कि RBI बैंकों के पास जमा इस अतिरिक्त पैसे को वापस अपने पास खींचना चाहता है ताकि अर्थव्यवस्था पर दबाव न पड़े।
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कैसे जमा हुआ इतना कैश?
विदेशी पूंजी के भारत आने, गिरते रुपये को संभालने के लिए RBI के करेंसी ऑपरेशन्स और उम्मीद से कम कैश निकालने की वजह से बैंकों के पास पैसों का अंबार लग गया। RBI चाहता था कि बैंक अपना ज्यादा पैसा कम समय के लिए, वेरियेबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) योजना के तहत उसके पास जमा कर दें। बैंक इस योजना में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि RBI जल्द ही सरकारी बॉन्ड (OMO) बेचेगा जहां उन्हें लंबे समय के लिए बेहतर मुनाफा मिलेगा।
RBI क्यों और कब बेच सकता है बॉन्ड?
9 अक्टूबर यानी शुक्रवार को सरकार ने 15 साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी किए हैं। इस नीलामी से बाजार की ब्याज दरों का रुख साफ होगा। एक्सपर्ट्स की मानें तो RBI इस नीलामी के नतीजों को देखने के बाद ही बॉन्ड बिक्री की कीमतों का ऐलान करेगा, ताकि बाजार की ब्याज दरों में अचानक बड़ा उछाल न आए। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा पहले ही साफ कर चुके हैं कि बैंकों के लिए कैश रिजर्व रेशियो (CRR) बढ़ाना उनका आखिरी विकल्प होगा।
RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 7 अक्टूबर को बैंकिंग सिस्टम में करीब 4.23 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त कैश मौजूद थी। वहीं, 8 अक्टूबर को कॉल मनी की औसतन दर घटकर 5.30 फीसदी दर्ज की गई। 8 अक्टूबर को 10 साल वाले सरकारी बॉन्ड पर ब्याज बढ़कर 7.29 फीसदी हो गई। यह दिसंबर 2023 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। RBI 10 दिनों की अवधि के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये की एक और नीलामी आयोजित करने जा रहा है लेकिन बाजार की मुख्य नजर बॉन्ड बिक्री के आधिकारिक ऐलान पर ही रहेगी।
आपकी जेब पर इसका सीधा असर
अगर रिजर्व बैंक बाजार से बहुत तेजी से पैसा खींचता है तो देश की आर्थिक रफ्तार को झटका लग सकता है। दूसरी तरफ, अगर वह ढील देता है तो महंगाई और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट बेकाबू हो जाएगी। रेपो रेट 5.50% होने और लिक्विडिटी घटने से आपके होम या ऑटो लोन की EMI में फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। नए लोन थोड़े महंगे जरूर हो सकते हैं।
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बैंकों को पैसा जुटाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। जानकारों का मानना है कि RBI अचानक बैंकों का रिजर्व बढ़ाने (CRR) जैसा कड़ा कदम उठाने के बजाय, सरकारी बॉन्ड बेचकर धीरे-धीरे और समझदारी से बाजार से अतिरिक्त पैसा बाहर निकालेगा।
