सुबह उठने से लेकर रात तक हम जो टूथपेस्ट, खाने का आटा, स्कूल की कॉपियां और जूते इस्तेमाल करते हैं। बाजार में उनके नाम अलग-अलग दिखाई देते हैं। लोगों को यही लगता है कि ये सारी चीजें अलग-अलग कंपनियों की हैं।  सच यह है कि इन सभी अलग दिखने वाले ब्रांड्स के पीछे गिनती की ही कुछ बड़ी पैरेंट कंपनियां होती हैं जिसे सब-ब्रांड स्ट्रेटजी कहा जाता है। 

 

इसमें एक बड़ी पैरेंट कंपनी बाजार में अलग-अलग नाम से अपने सामान और ब्रांड लाती है ताकि हर तरह के ग्राहकों तक आसानी से पहुंचा जा सके। सिगरेट बनाने के काम से शुरुआत करने वाली आईटीसी हो, जूतों के लिए मशहूर बाटा हो या फिर इमामी, रिलैक्सो और डाबर जैसी बड़ी पैरेंट कंपनियां हों ये सभी इसी बिजनेस स्ट्रेटजी का इस्तेमाल करती हैं।

 

1. ITC लिमिटेड

 

इम्पीरियल टोबैको कंपनी (ITC) की शुरुआत साल 1910 में कलकत्ता शहर में हुई थी। इसका सबसे बड़ा बाजार भारत के गांवों और शहरों दोनों जगहों पर फैला हुआ है। शुरुआत में यह कंपनी सिर्फ तंबाकू और सिगरेट बनाने का काम करती थी।  बाद में इसने अपनी बिजनेस स्ट्रेटजी बदलते हुए रोजमर्रा की खाने-पीने और उपयोग की चीजें बनानी शुरू कर दीं। आज इस बड़ी कंपनी के तहत कई जाने-माने ब्रांड आते हैं। 

 

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  • आशीर्वाद (आटा और मसाले)
  • सनफीस्ट (बिस्कुट)
  • बिंगो (नमकीन और स्नैक्स)
  • यिप्पी (नूडल्स)
  • सावलन और फियांमा (साबुन और नहाने का सामान)
  • निमायल (घर की साफ-सफाई का सामान)
  • क्लासमेट (कॉपी और पेन)
  • फेबेल (चॉकलेट)
  • बी नेचुरल (फ्रूट जूस)

 

2. बाटा इंडिया

 

बाटा कंपनी की असली शुरुआत साल 1894 में चेक रिपब्लिक देश में हुई थी। भारत में इसकी शुरुआत 1930  में हुई थी और इसका हेड ऑफिस गुरुग्राम में है। भारत में इस ब्रांड का सबसे बड़ा बाजार शहरों और छोटे कस्बों में है। लोग सिर्फ बाटा को ही जूते की कंपनी के रूप में जानते हैं लेकिन यह कंपनी अलग-अलग उम्र और बजट के हिसाब से कई दूसरे ब्रांड चलाने की स्ट्रेटजी अपनाती है। 

 

  • हश पपिज (ऑफिस और फॉर्मल जूते)
  • नॉर्थ स्टार और पावर (खेलने और पहनने के स्टाइलिश जूते)
  • वेनब्रेनर (पुरुषों के मजबूत जूते)
  • बबलगमर्स (छोटे बच्चों के जूते)
  • मैरी क्लेयर (महिलाओं के जूते)
  • शॉल (आरामदायक और सेहतमंद जूते)

3. इमामी लिमिटेड

 

इमामी कंपनी की शुरुआत साल 1974 में कोलकाता शहर में हुई थी। इसका सबसे बड़ा बाजार छोटे शहरों और उत्तर व पूर्व भारत के राज्यों में सबसे ज्यादा मजबूत है। यह कंपनी मुख्य रूप से चेहरे और शरीर पर लगाने वाले सामान बनाती है। इस बड़ी कंपनी ने कई पुराने और मशहूर ब्रांड्स को खरीदने और उन्हें आगे बढ़ाने की स्ट्रेटजी पर काम किया है। 

 

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  • बोरोप्लस (त्वचा की देखभाल और क्रीम)
  • नवरत्न (ठंडा तेल)
  • झंडू (आयुर्वेदिक दवाएं)
  • केश किंग (बालों का तेल)
  • डर्मीकूल (पाउडर)
  • स्मार्ट एंड हैंडसम (लड़कों की क्रीम)
  • मेंथोस प्लस बाम (दर्द ठीक करने वाला बाम)

 

4. रिलैक्सो फुटवियर

 

रिलैक्सो कंपनी की शुरुआत साल 1976 में दिल्ली में हुई थी। इसका मुख्य ऑफिस दिल्ली और गुरुग्राम में है। इस कंपनी का सबसे बड़ा बाजार आम लोग और मिडल क्लास लोगों के लिए हैं। इसके जूते-चप्पल छोटे शहरों और गांवों में सबसे ज्यादा बिकते हैं। यह कंपनी सस्ते और टिकाऊ जूते-चप्पल बनाती है। ग्राहकों को कोई कन्फ्यूजन न हो, इसलिए कंपनी ने अलग-अलग नाम से अपने ब्रांड बाजार में उतारने की स्ट्रेटजी अपनाई है। 

 

  • स्पार्क्स (खेलने और घूमने के जूते)
  • फ्लाइट और बहामास (रोज पहनने वाली चप्पलें)
  • स्कूलमेट (स्कूल के बच्चों के जूते)

 

5. डाबर इंडिया

 

डाबर की शुरुआत साल 1884 में कलकत्ता में आयुर्वेदिक दवा की एक छोटी सी दुकान के रूप में हुई थी। आज इस कंपनी का मुख्य ऑफिस गाजियाबाद में है। डाबर का सबसे बड़ा बाजार भारत के अलावा विदेशों में जैसे मिडिल ईस्ट और दूसरे देशों में भी है। डाबर का नाम आते ही मन में शहद, च्यवनप्राश और आंवला तेल जैसी चीजें आ जाती हैं। आयुर्वेदिक पहचान और भरोसे के साथ यह कंपनी बाजार में कई अलग-अलग उत्पादों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखती है।

 

  • रियल (फ्रूट जूस)
  • हजमोला (पेट की गोली)
  • वाटिका (बालों का तेल और शैम्पू)
  • डाबर हनी (असली शहद)
  • डाबर रेड पेस्ट (टूथपेस्ट)
  • ओडोनिल (घर की बदबू भगाने वाला एयर फ्रेशनर)
  • फेम (ब्लीच और फेशियल का सामान)
  • गुलाबरी (गुलाब जल और स्किन केयर)