आज के समय में भारत में कुछ ऐसे नए बिजनेस हैं जो अभी पूरी तरह से बड़े नहीं हुए हैं लेकिन आने वाले समय में ये देश की पूरी अर्थव्यवस्था को बदल कर रख देंगे। इन्हें सनराइज सेक्टर कहा जाता है। ये बिजनेस पुरानी सोच को छोड़कर नई तकनीक और नए आइडियाज पर काम कर रहे हैं। जिस तरह से पहले क्लीन एनर्जी और सोशल मीडिया जैसे सेक्टर ने दुनिया को बदला था वैसे ही आज के ये नए सेक्टर भी बड़ी कमाई का जरिया बन रहे हैं और इनमें बहुत ज्यादा निवेश हो रहा है।

 

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का काम पिछले दस सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है। पहले हम जितना इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाते थे उसकी कीमत करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 11.3 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है और इसमें मोबाइल फोन का सबसे बड़ा रोल है। भारत जो सामान दूसरे देशों को बेचता है वह भी पिछले कुछ सालों में 100 गुना से ज्यादा बढ़ गया है। अगर फाइनेंसियल ईयर 2026 की बात करें तो हमने करीब 47.96 बिलियन डॉलर का सामान बाहर बेचा है जो पिछले साल से 24 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें से अकेले अमेरिका ने हमसे करीब 19.68 बिलियन डॉलर का सामान खरीदा है जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है। 

 

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सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने के काम को और आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू किया है। इसके लिए फाइनेंसियल ईयर 2026 से 2027 के बजट में 1000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस पूरे मिशन के लिए सरकार ने कुल 76000 करोड़ रुपये तय किए हैं जिसमें से 65000 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं और अभी 24 नई कंपनियां इस काम को बेहतर बनाने में जुटी हैं।

रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती चमक

भारत अब रिन्यूएबल एनर्जी यानी सौर और पवन ऊर्जा के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। मार्च 2026 तक देश में कोयला और पेट्रोल जैसे ईंधन को छोड़कर अन्य स्रोतों से 283.46 गीगावाट बिजली बनने लगी है। इसमें सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है जिससे 150.26 गीगावाट बिजली मिल रही है और पवन ऊर्जा से 56.09 गीगावाट बिजली पैदा हो रही है। भारत ने जून 2025 में ही पर्यावरण से जुड़ी पेरिस की संधि के लक्ष्यों को समय से 5 साल पहले ही पूरा कर लिया था। सरकार ने बजट 2026 से 2027 में रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय के लिए 44614 करोड़ रुपये दिए हैं जो पिछले साल के बजट से 40 प्रतिशत ज्यादा है। इसके अलावा नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के लिए भी 19744 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट ऊर्जा बनाने का है और जिस तेजी से काम चल रहा है उससे लगता है कि यह लक्ष्य आसानी से पूरा हो जाएगा।

बदलता ट्रांसपोर्ट का दौर

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं और इनकी बिक्री बहुत तेजी से बढ़ रही है। साल 2026 में पूरे 24.52 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकी हैं जो पिछले साल के मुकाबले 24.6 प्रतिशत ज्यादा हैं। इलेक्ट्रिक कारों की मांग में तो 83.6 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक का बाजार सबसे बड़ा है और इनकी 14 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिकी हैं। अगर पिछले चार सालों की बात करें तो भारत में पूरे 83 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिक चुकी हैं।

 

सरकार का सपना है कि 2030 तक भारत में बिकने वाली हर 100 में से 30 गाड़ियां इलेक्ट्रिक हों। इसके लिए पूरे देश में 12000 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन बनाए जा चुके हैं। सरकार ने प्राइम मिनिस्टर इलेक्ट्रिक ड्राइव यानी पीएम ई ड्राइव स्कीम के लिए 10900 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और बैटरी बनाने के सामान पर टैक्स में भी छूट दी है ताकि हमें दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े।

फार्मा का बढ़ता कारोबार

भारत आज दुनिया में दवा बनाने वाला एक बड़ा देश है और हम 191 देशों को अपनी दवाइयां भेज रहे हैं। फाइनेंसियल ईयर 2026 में हमारा फार्मा एक्सपोर्ट 31 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है जिसमें से आधी दवाइयां अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े देशों में गई हैं। अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का व्यापार भी 2020-21 के 2.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 4.1 बिलियन डॉलर हो गया है।

 

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सरकार ने बजट 2026-27 में बायोफार्मा शक्ति नाम से एक नई योजना शुरू की है जिसमें अगले पांच सालों में 10000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे ताकि भारत बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं का बड़ा केंद्र बन सके। अभी मेडिकल उपकरणों का बाजार करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये का है और इसे 2030 तक 4.27 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है। ये सभी क्षेत्र सरकार की मदद से बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और आगे चलकर पैसे लगाने के लिए बहुत अच्छे विकल्प साबित होंगे।