जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए रिकॉर्ड 31,960 करोड़ रुपये आए हैं जो जून के मुकाबले 0.6 फीसदी और पिछले साल से 12.3 फीसदी ज्यादा हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का पूरे एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 4.3 फीसदी बढ़कर 85.8 लाख करोड़ रुपये और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का एयूएम 2.7 फीसदी बढ़कर 41.8 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि इक्विटी स्कीम्स में जून के 28,900 करोड़ रुपये के मुकाबले जुलाई में कम यानी 26,200 करोड़ रुपये का नया निवेश आया है लेकिन हर महीने आने वाला एसआईपी का पैसा म्यूचुअल फंड्स को लगातार नई खरीदारी की ताकत दे रहा है।
जुलाई में टेक्नोलॉजी सेक्टर पर फंड मैनेजरों का सबसे ज्यादा भरोसा दिखा है। जून में इस सेक्टर का वजन घटकर 5.9 फीसदी रह गया था जो जुलाई में 70 बेसिस पॉइंट बढ़कर 6.6 फीसदी हो गया है, हालांकि सालभर पहले के मुकाबले यह अभी भी 140 बेसिस पॉइंट नीचे है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में लगातार तीसरे महीने पैसा बढ़ाया गया है जिससे इसका वजन बढ़कर 8.9 फीसदी हो गया है। यह महीने भर में 30 बेसिस पॉइंट और सालभर में 80 बेसिस पॉइंट ज्यादा है जिससे पता चलता है कि फंड मैनेजरों ने ऑटो सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत की है।
यह भी पढ़ें: कर्नाटक में गुटखा पर लगा बैन, सुपारी कारोबार और किसानों पर क्या होगा असर?
ई-कॉमर्स सेक्टर भी फंड मैनेजरों की पसंद में ऊपर रहा है और इसका वजन लगातार तीसरे महीने बढ़कर 3.1 फीसदी के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा हेल्थकेयर, एनबीएफसी-लेंडिंग और टेलीकॉम सेक्टर्स में भी महीने-दर-महीने हिस्सेदारी बढ़ाई गई है। साथ ही, एनबीएफसी-नॉन-लेंडिंग और हेल्थकेयर में 15-15 फंड्स बीएसई 200 के मुकाबले कम से कम 1 फीसदी ज्यादा निवेश के साथ ओवरवेट रहे हैं जबकि ई-कॉमर्स में 10 फंड्स और कैपिटल गुड्स तथा केमिकल्स में 9-9 फंड्स ओवरवेट स्थिति में रहे हैं।
कैपिटल गुड्स में घटा निवेश
प्राइवेट बैंकों में म्यूचुअल फंड्स का वजन जुलाई में 17.4 फीसदी रहा है जो महीने और साल दोनों आधार पर 50 बेसिस पॉइंट की गिरावट दर्शाता है। कैपिटल गुड्स का वजन भी जून के 24 महीने के सबसे ऊंचे स्तर 8.1 फीसदी से घटकर 7.6 फीसदी रह गया है।
फंड मैनेजरों ने ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक, यूटिलिटीज, रिटेल, इंश्योरेंस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर्स में भी अपनी हिस्सेदारी घटाई है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, बीएसई 200 के मुकाबले 19 फंड्स ऑयल एंड गैस सेक्टर में कम निवेश के साथ अंडरवेट थे जबकि प्राइवेट बैंकों में 15 फंड्स, कंज्यूमर सेक्टर में 14 फंड्स, पीएसयू बैंकों में 12 फंड्स और यूटिलिटीज सेक्टर में 11 फंड्स अंडरवेट रहे हैं।
यह भी पढ़ें: जनगणना में पूछे जाएंगे 40 सवाल, जाति और Covid वैक्सीन लगवाने की जगह बतानी होगी
किन शेयरों में पैसा कम किया गया?
दूसरी तरफ, फंड्स ने एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एलएंडटी, वरुण बेवरेजेस, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, डॉ रेड्डीज लैब्स, एवेन्यू सुपरमार्ट्स, बैंक ऑफ बड़ौदा और एनटीपीसी के शेयरों में अपनी होल्डिंग की वैल्यू घटाई है। इन सभी आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि एसआईपी का पैसा किसी एक या दो सेक्टर्स में नहीं जा रहा है बल्कि फंड मैनेजर बाजार की स्थिति को देखते हुए पोर्टफोलियो में लगातार बदलाव कर रहे हैं। यह पूरा डेटा केवल जुलाई महीने की स्थिति को दिखाता है, किसी एक महीने में वजन घटने या बढ़ने को सीधे तौर पर किसी शेयर या सेक्टर पर हमेशा के लिए तेजी या मंदी की राय नहीं माना जाना चाहिए।
