ताइवान ने भारतीय शेयर बाजार को पीछे छोड़ दिया है। अब ताइवान का शेयर बाजार दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बाजार बन गया है जबकि भारत एक पायदान नीचे खिसककर छठे नंबर पर आ गया है। ब्लूमबर्ग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ताइवान के बाजार की पूरी कीमत यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 4.95 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है जबकि इसके मुकाबले भारतीय शेयर बाजार की कुल कीमत घटकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर रह गई है। यह सब मुख्य रूप से कंप्यूटर या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप की वजह से हुआ है। इस चिप की पूरी दुनिया में बढ़ती मांग ने ताइवान के बाजार को आगे बढ़ा दिया है और भारत को पछाड़कर अपनी जगह बनाई है।

 

शेयर बाजार में मार्केट कैप का मतलब होता है कि किसी देश के बाजार में लिस्टेड सभी कंपनियों के शेयरों की पूरी कीमत कितनी है। इस समय दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में अमेरिका 50 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले नंबर पर बना हुआ है। इसके बाद चीन 9 से 10 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर और जापान 6.50 से 7 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे नंबर पर इसके साथ ही हांगकांग 5 से 5.50 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे नंबर पर आता है। इस लिस्ट में अब बदलाव हुआ है जिसके बाद ताइवान 4.95 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ पांचवें नंबर पर आ गया है और भारत 4.92 ट्रिलियन डॉलर के साथ छठे नंबर पर है। इन दोनों देशों के बाजारों के बीच अब बहुत थोड़ा सा गैप बचा है।

 

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आगे निकलने का असली वजह

ताइवान के बाजार में आई इस तेजी का सबसे बड़ा कारण वहां की कंप्यूटर हार्डवेयर और चिप बनाने वाली कंपनियां हैं। ताइवान में दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनी है जिसका नाम ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) है। पूरी दुनिया में इस समय AI तकनीक का क्रेज चल रहा है और इस तकनीक को चलाने के लिए इन चिप की बहुत मांग है।

 

इस वजह से टीएसएमसी कंपनी के शेयर इस साल 49% तक महंगे हो गए हैं। ताइवान के पूरे शेयर बाजार में अकेले इस एक कंपनी का हिस्सा लगभग 42% है। जब इस कंपनी के शेयर बढ़े तो पूरा ताइवान का बाजार ऊपर चला गया। इसके अलावा ताइवान के नियमों में भी कुछ बदलाव हुए हैं जिससे वहां के घरेलू फंड अब इस बड़ी कंपनी में ज्यादा निवेश कर सकते हैं। जेपी मॉर्गन के मुताबिक इस बदलाव से ताइवान के बाजार में 6 अरब डॉलर का नया निवेश आ सकता है।

भारतीय शेयर बाजार के नीचे आने की वजह

जहां एक तरफ ताइवान का बाजार ऊपर जा रहा है वहीं भारतीय बाजार पर इस समय थोड़ा दबाव देखा जा रहा है। भारत के इंडेक्स में इस साल गिरावट आई है जो पिछले दस सालों की लगातार बढ़त के बाद पहली सालाना गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। इसका सबसे पहला और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की भारी बिक्री है। विदेशी बड़े निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजार से करीब 24 अरब डॉलर की बड़ी रकम निकाल ली है और वे इस पैसे को ताइवान और कोरिया जैसे चिप बनाने वाले बाजारों में लगा रहे हैं।

 

इसके साथ ही बाजार पर महंगे तेल और कमजोर होते रुपये का भी बुरा असर पड़ा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने की वजह से भारत में महंगाई की चिंता काफी बढ़ गई है जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। वहीं एक और जरूरी वजह मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल (MSCI) इंडेक्स में आई कमी भी है। एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का वेटेज पिछले साल के 19% से घटकर अब करीब 12% रह गया है। 

 

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शेयर बाजार और देश की अर्थव्यवस्था का गैप

भले ही शेयर बाजार की पूरी वैल्यू के मामले में ताइवान का बाजार भारत से आगे निकल गया हो लेकिन जब पूरे देश की कमाई और अर्थव्यवस्था की बात आती है तो भारत बहुत आगे है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक भारत की पूरी अर्थव्यवस्था यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके मुकाबले ताइवान की  पूरी अर्थव्यवस्था सिर्फ 977 बिलियन डॉलर की है। यानी देश के तौर पर भारत बहुत बड़ा और मजबूत है।