पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर 24 परगना जिले की गायघाटा विधानसभा सीट पर एक अजीबोगरीब विवाद खड़ा हो गया। कुचुलिया गांव के कुचुलिया प्राइमरी स्कूल में एक पोलिंग बूथ बना था। जहां पर केंद्रीय सुरक्षाबलों (CAPF) द्वारा बुजुर्ग मतदाताओं को उनके पारंपरिक पहनावे (लुंगी) के कारण मतदान केंद्र में जाने से रोकने का मामला सामने आया है।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षा में तैनात जवानों ने कई बुजुर्गों को कतार से बाहर कर दिया और उनसे कहा कि वे घर जाकर पैंट पहनकर आएं, तभी उन्हें वोट डालने दिया जाएगा। इस अघोषित 'ड्रेस कोड' के कारण इलाके में नाराजगी फैल गई और विवाद खड़ा हो गया।

 

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बुजुर्ग वोटर को लौटना पड़ा घर

इस घटना का शिकार हुए 78 वर्षीय अली मंडल ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया, 'मैं पिछले 30 साल से लुंगी पहन रहा हूं और हमेशा इसी में वोट देता आया हूं लेकिन इस बार लाइन में खड़े-खड़े जवानों ने मुझे रोक दिया और कहा कि लुंगी में वोट नहीं डाल सकते। मुझे घर जाकर पैंट पहनकर आना पड़ा।' दिशार अली के पास खुद की पैंट नहीं थी, इसलिए उन्हें अपने पोते से पैंट उधार लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले कभी इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

 

इसी तरह 80 साल के गणेश मजूमदार के साथ भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने बताया, 'मैं लुंगी पहनकर वोट डालने गया था लेकिन मुझे रोक दिया गया। फिर मुझे घर लौटकर पैंट पहननी पड़ी और दोबारा आना पड़ा।'

 

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ग्रामीणों में नाराजगी, उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा इलाका ग्रामीण है, जहां अधिकतर बुजुर्ग लुंगी पहनते हैं। उनका कहना है कि पहले कभी इस तरह का कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया था, इसलिए यह कार्रवाई समझ से परे है। घटना के बाद कुछ जगहों पर विरोध भी देखने को मिला। विवाद बढ़ने के बाद बताया जा रहा है कि सुरक्षाकर्मियों ने यह पाबंदी हटा ली और इसके बाद लुंगी पहनकर आने वाले मतदाताओं को मतदान से नहीं रोका गया। हालांकि, इस पूरे मामले पर न तो प्रीसाइडिंग ऑफिसर और न ही CAPF की ओर से कोई आधिकारिक बयान दिया गया है।