आज के दौर में कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने अपनी राजनीति से पहले ऐक्टिंग में करियर आजमाया था जबकि उस दौरान उन्हें कम फेम मिला। इसके बजाय नेता बनने के बाद वे सेलिब्रिटीज सफल रहे और लाइमलाइट से कभी दूर नहीं हुए। इस सिलसिले में सबसे पहला नाम चिराग पासवान का आता है, जिन्होंने पहली फिल्म करने के बाद ही फिल्मी जगत से मुंह मोड़ लिया और राजनीति में शामिल हो गए। उनका राजनीतिक करियर सफल रहा है। इसके अलावा रवि किशन , शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा ने भी ऐक्टिंग के बाद राजनीति में कदम रखा।

 

रवि किशन एक ऐसे नेता हैं जो अक्सर अपनी बातों और भाषणों की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐक्टर के राजनीति में जुड़ने के बाद उसका फिल्मी करियर खत्म हो जाता है लेकिन इसके ठीक विपरीत रवि किशन ने राजनीति में जुड़ने के बाद बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई। हालांकि, अभिनेता लव सिन्हा ऐसे भी हैं जिन्होंने ऐक्टिंग और राजनीति दोनों में हाथ आजमाए लेकिन कोई खास पहचान नहीं बना पाए। आइए जानते हैं कि चिराग पासवान और रवि किशन ने कैसे सफलता हासिल की थी।

 

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राजनीति में रहे हिट

चिराग पासवान- बिहार की राजनीति में चिराग पासवान को युवा नेता के तौर पर देखा जाता है, जो वर्तमान में एनडीए (NDA) गठबंधन के कैबिनेट मंत्री हैं। चिराग पासवान स्वर्गीय रामविलास पासवान के बेटे हैं, जो लोक जनशक्ति पार्टी के बड़े नेता रहे हैं। आज उनके राजनीतिक करियर ने बुलंदियां छू ली हैं। हालांकि, पहले उनकी राजनीति में खास रुचि नहीं थी। राजनीति से पहले उनकी ख्वाहिश थी कि वह एक हिट एक्टर बनें, जबकि ऐसा नहीं हो पाया।

 

चिराग पासवान को बचपन से ही एक्टर बनने का शौक था। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह मायानगरी मुंबई आ गए, जहां उन्हें एक फिल्म मिली, जिसमें उन्होंने कंगना रनौत के अपोजिट बतौर लीड एक्टर काम किया। इस फिल्म का नाम 'मिले ना मिले हम' था, जो 2011 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई। हालांकि यह फिल्म लोगों को कुछ खास पसंद नहीं आई और फ्लॉप हो गई। यहीं से चिराग पासवान को समझ आ गया कि उन्हें फिल्मी करियर छोड़ देना चाहिए।

 

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चिराग पासवान ने फिल्मी करियर छोड़ने के बाद राजनीति से जुड़ गए। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपने पिता रामविलास पासवान का चुनाव में साथ दिया। इसी चुनाव में वह जमुई लोकसभा सीट से चुनाव लड़े, जहां उन्हें जीत मिली। उसके बाद चिराग पासवान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजनीति में अपना करियर बना लिया।

 

रवि किशन - यह ऐसे कलाकार हैं जिन्हें भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे बड़े एक्टरों में से एक माना जाता है। उनकी ख्वाहिश थी कि वह सिर्फ भोजपुरी फिल्मों तक सीमित न रहें। उनका सपना था कि वह हिंदी सिनेमा यानी बॉलीवुड में भी काम करें। जल्द ही उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम किया। रवि किशन ने सिर्फ भोजपुरी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी लगभग 750 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। रवि किशन ने 2009 में हिंदी फिल्म 'लक' में काम किया था, जहां उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती के भांजे का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने 'तेरे नाम' फिल्म में भी खास किरदार निभाया, लेकिन उनके किरदार को लोगों के बीच कोई खास पहचान नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 'फिर हेरा फेरी' और 2019 में आई 'बटला हाउस' जैसी फिल्मों में भी काम किया, जहां उन्हें कुछ खास पहचान नहीं मिली।

 

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इसी बीच रवि किशन ने 2014 से राजनीति में हाथ आजमाना शुरू किया। उन्होंने 2014 में कांग्रेस पार्टी जॉइन की थी। उसके बाद 2017 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और 2019 में बीजेपी (BJP) से जुड़ गए। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में रवि किशन गोरखपुर सीट से चुनाव लड़े और जीत गए। इसके बाद वह सांसद बन गए। सांसद बनने के बाद उन्हें न सिर्फ राजनीतिक करियर, बल्कि एक्टिंग करियर में भी सफलता मिली। सांसद बनने के बाद रवि किशन ने 'लापता लेडीज' और 'मामला लीगल है' जैसी फिल्मों और वेब सीरीज में अहम किरदार निभाए, जिन्हें लोगों ने बेहद पसंद किया।

 

राजनीति और बॉलीवुड में असफल

लव सिन्हा - लव ने 'सदियां' फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा था लेकिन यह फिल्म नहीं चल पाई। इसके बाद उन्होंने 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ा, जहां वह बीजेपी (BJP) के उम्मीदवार नितिन नवीन से हार गए।