विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म 'रणबाली' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। यह एक ऐक्शन पीरियड ड्रामा फिल्म है जो 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। शादी के बाद पहली बार विजय और रश्मिका मंदाना साथ में काम कर रहे हैं। इसके अलावा फिल्म में इंटरनेशनल एक्टर अर्नोल्ड वोस्लू विलेन का रोल प्ले कर रहे हैं।
इस फिल्म में भारत के इतिहास की अनुसनी कहानी को पर्दे पर दिखाया जाएगा। इस फिल्म के रिलीज का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। क्या आप 'रणबाली' की असली कहानी के बारे में जानते हैं?
यह भी पढ़ें: नाना पाटेकर के बेटे ने क्यों बनाई फिल्मों से दूरी, क्या करते हैं मल्हार पाटेकर?
क्या है 'रणबाली' की असल कहानी?
1876-1878 के दशक के बीच में भारत का सबसे भयानक अकाल पड़ा था जिस पर रणबाली की कहानी आधारित है। इस संकट ने दक्षिण और पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों को प्रभावित किया था जिसमें आज के आंध्रप्रदेश का रायलसीमा इलाका भी शामिल था जो अक्सर सूखे की चपेट में रहता है। 1870 के दशक के बीच में बार-बार सूखा पड़ने से खेती कमजोर हो गई थी।
जब 1876 में बारिश नहीं हुई तो फसलें बर्बाद हो गईं और खाने की कमी से बड़े पैमाने पर भुखमरी का संकट आ गया। इसकी वजह से किसानों की फसलें और रोजी रोटी रोटी दोनों ही छिन गई थीं। हालांकि इतिहासकारों का कहना है कि यह त्रासदी सिर्फ सूखे की वजह से नहीं हुई थी। अंग्रेजी शासकों की नीतियों ने इस स्थिति को बदतर बना दिया था। उस समय भारत ब्रिटिश राज के अधीन था जिसकी आर्थिक नीतियों में अक्सर स्थानीय भलाई की बजाय साम्राज्य के व्यापार को प्राथमिकता दी जाती थी।
भुखमरी से 7 लाख लोगों की हुई थी मौत
सूखे से प्रभावित इलाकों में अकाल फैलने के बावजूद भारत से अनाज का निर्यात दुनियाभर में जारी रहा। अकाल प्रंबधन की देख रेख करने वाले ब्रिटिश अधिकारी सर रिचर्ड टेंपल ने सरकारी खर्च को नियमित रखने के लिए राहत शिविरों में सख्त नियम लागू किए। खाद्य राशन में भारी कटौती की गई। जेल में रहने वाले कैदियों के खाने में भी भारी कटौती की गई। इन नियमों की वजह से लोगों भुखमरी से मरने लगे। माना जाता है कि अकेले रायलसीमा में ही लगभग 7 लाख लोगों की मौत हुई थी।
यह भी पढ़ें: 'रणबाली' का ट्रेलर देख फैंस के खड़े हुए रोंगटे, कब रिलीज होगी फिल्म?
इतिहासाकारों के मुताबिक पूरे भारत में इस अकाल के कारण एक करोड़ से ज्यादा लोगों की जान गई थी। 'रणबाली' को बनाने की प्रेरणा यही से मिली है। जैसे-जैसे भुखमरी फैली और टैक्स वसूले जाते रहे, अकाल से जूझ रहे कुछ लोगों ने ब्रिटिश सरकार का विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया। ग्रामीणों ने अनाज भंडार पर छापे मारे और जीवित रहने के लिए विद्रोह किया। ब्रिटिश राज में अक्सर इन कामों को बगावत माना गया लेकिन रायलसीमा की लोक कहानियों में ऐसे लोगों को याद किया जाता है।
