फिल्म निर्देशक प्रवीण तरडे की फिल्म 'देऊल बंद 2' बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। इस फिल्म का बजट करीब 8 से 10 करोड़ रुपये है। फिल्म ने करीब 80 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। यह एक लो बजट फिल्म है जिसने मराठी इंडस्ट्री की टॉप 5 फिल्मों में अपना नाम शामिल कर दिया था। फिल्म की जमकर तारीफ हो रही है।

 

निर्देशक प्रवीण तरडे ने बताया कि अगर शाहरुख खान नहीं होते तो यह फिल्म सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने हमारा करीब 42 से 45 लाख का बिल माफ कर दिया। प्रवीण ने अपने लेटेस्ट इंटरव्यब में बताया कि उन्होंने शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस रेड चिल्लीज एंटरटेनमेंट को डिजिटल सिनेमा पैकेज के लिए अप्रोच किया था। यह एक डिजिटल प्रकिया है जिसकी मदद से सिनेमाघरों तक फिल्म पहुंचती है।

 

यह भी पढ़ें: गदर से कम नहीं है सनी की 'बंटवारा 1947', टीजर देख लोगों ने की जमकर तारीफ

शाहरुख ने माफ किया था लाखों का बिल

प्रवीण ने बताया, 'मेकर्स के पास इसके लिए बजट करीब 12 लाख रुपये था और इस प्रकिया में करीब 42 लाख रुपये खर्च हो गए। उस समय हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि बिल चुका सके। ना ही हमारे पास कोई सोर्स था जहां से इतने पैसे अरेंज कर पाते। हमने इस बारे में रेड चिल्लीज से मदद की अपील की। हमारी बात सीधा शाहरुख तक पहुंच गई।'

 

शाहरुख को बताया गया कि यह मुलशी पैटर्न वाली फिल्म है। सलमान खान इस पैटर्न पर फिल्म 'अंतिम' बना चुके थे। उन्हें इसके बारे में पता था। वह हमारा काम जानते थे। उन्होंने हमारी फिल्म 'देऊल बंद 2' के बारे में बात की। उन्हें पता था कि यह एक इमोशनल फिल्म है लेकिन हम डीसीपी का खर्च नहीं उठा सकते थे।

 

यह भी पढ़ें: क्या है जीनत अमान का हिंदू नाम? मां करती थीं घंटों पूजा, खुद नहीं हैं धार्मिक

 

फिल्म मेकर ने आगे बताया, 'शाहरुख ने एकदम से जवाब देते हुए कहा कि यह मराठी फिल्म है। उन्हें डीसीपी दे दो। हम पेमेंट का बाद में देख लेंगे। अगर वह अच्छी फिल्म है तो डीसीपी दे दो। उनके मन में मराठी सिनेमा के प्रति बहुत इज्जत है। उनके लिए फिल्म जरूरी थी, पैसे नहीं। मैं इस फिल्म की सफलता हर एक व्यक्ति को देना चाहता हूं।'

 

'देऊल बंद 2' ने बॉक्स ऑफिस पर 81.78 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था। इस फिल्म का पहला भाग साल 215 मे रिलीज हुआ था। इस फिल्म में स्नेह तरडे ने मुख्य भूमिका निभाई है। अभिनेता मोहन जोशी ने स्वामी समर्थ का किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी किसानों के आत्महत्या पर आधारित है।