श्रद्धा कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म ईथा रिलीज से पहले ही चर्चा में बनी हुई है। यह फिल्म विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन पर आधारित है। यह एक बायोपिक मूवी है जिसमें श्रद्धा ने विठाभाई का रोल प्ले किया है। विठाभाई को लोग तमाशा क्वीन के नाम से जाना जाता था। मेकर्स ने आधाकारिक रूप से फिल्म का नया टीजर जारी किया है। टीजर को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

 

कॉकटेल 2 के रिलीज के साथ मेकर्स ने ईथा की छोटी सी क्लिप शेयर की थी जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। अब टीजर आ गया है जिसका दर्शकों को इंतजार था। यह फिल्म 28 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। आइए जानते हैं दर्शकों को फिल्म का टीजर कैसा लगा?

 

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'ईथा' का धमाकेदार टीजर रिलीज

टीजर की शुरुआत लोगों के भीड़ के साथ होती है जो स्टेज के सामने ईथा ईथा चिल्लाते हुए नजर आ रहे हैं। हमने ईथा बाई का डांस देखने के पैसे दिए हैं। उसके तुरंत बाद श्रद्धा का डिलीवरी सीन दिखाया जाता है जिसमें दर्द से तड़प रही है। वही बैकग्राउंड में श्रद्धा कहती हैं,  'पड़े पड़े मरी तो बेचारी कहलाऊंगी। पर नाचते हुए मरी तो मिसाल बन जाऊंगी।' इसके बाद कड़क आवाज में एक व्यक्ति कहता है, 'तो बन जा मिसाल।'

 

 

वह बच्चे को जन्म देने के बाद पूरी तरह से तैयार होकर परफॉर्मेंस देने के लिए स्टेज पर पहुंचती हैं। इसके बाद श्रद्धा को कुछ सीन्स में डांस करते और उनके लोकप्रियता को दर्शाया जाता है। आखिर में एक व्यक्ति कहता है, पान में पान चखना हो तो मीठा और तूफान को नांचते हुए देखना हो तो ईथा। फिल्म के टीजर ने दर्शकों की एक्साइटमेंट को बढ़ा दिया है।

'ईथा' और 'टॉक्सिक' में होगा महाक्लैश

साउथ सुपरस्टार यश की फिल्म 'टॉक्सिक' 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यश ने हाल ही में रिलीज डेट अनाउंस की थी। वह श्रद्धा की ईथा 28 अगस्त को रिलीज होगी। दोनों फिल्मों के रिलीज का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है। कौन सी फिल्म दर्शकों का दिल जीतती है? यह देखना दिलचस्प होगा।

 

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कौन थीं विठाबाई?

विठाबाई महाराष्ट्र की मशहूर लावाणी डांसर और तमाशा कलाकार थीं। उनका जन्म 1 जुलाई 1995 को महाराष्ट्र के पंढरपूर गांव में हुआ था। उनके पिता भाऊ बापू नारायणगांवरकर खुद तमाशा मंडली चलाते थे। 10 साल की उम्र में विठाबाई ने परफॉर्म करना शुरू कर दिया था। वह इतनी लोकप्रिय थी कि राज कपूर ने उन्हें फिल्मों का ऑफर दिया था लेकिन उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया था। उन्होंने अपनी कला को जिंदा रखने के लिए यह फैसला लिया था। उनका अपनी कला को लेकर इतना समर्पण था कि उन्होंने गर्भवस्था में भी परफॉर्म करना नहीं छोड़ा। कमाल की बात यह थी कि बैक स्टेज उन्हें लेबर पेन शुरू हो गया था। उन्होंने बच्चे को जन्म दिया और पत्थर से गर्भनाल काटी और कुछ ही देर बाद स्टेज पर नाचने लगीं। उन्हें कला के श्रेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए दो बार राष्ट्रपति से पुरस्कार मिला था। 15 जनवरी, 2002 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।