सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में मंगलवार तक 2 करोड़ रुपये जमा कराने का आखिरी मौका दिया है। कोर्ट ने राजपाल को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें असल में जेल में होना चाहिए। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने कहा, '15 सितंबर के हमारे आदेश में 2 करोड़ रुपये जमा करवाने के लिए कहा गया था जिसका पालन नहीं हुआ है। उन्हें मंगलवार तक यह रकम जमा करवानी होगी।' बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की है।
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने 4 डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी दिखाई जिनमें से हर एक ड्राफ्ट 50 लाख का था। वकील ने कहा कि ये ड्राफ्ट महाराष्ट्र में जारी किए गए थे और इन्हें दिल्ली लाया जा रहा है।
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राजपाल ने कोर्ट में नहीं जमा किए पैसे
कर्ज देने वाली कंपनी के सीनियर वकील अजीत कुमार सिन्हा ने कोर्ट से कहा कि याचिकाकर्ता एक ऐक्टर हैं और ऐक्टिंग में माहिर हैं। उन्होंने कोर्ट को सलाह दी कि इन फोटो कॉपी पर भरोसा न करें। ऐसा हो सकता है कि एक डिमांड ड्राफ्ट की 4 फोटोकॉपी हो जिसमें सिर्फ 50 लाख रुपये लिखे हो।
बेंच ने कहा कि हम दिल से उनकी याचिका खारिज करना चाहते हैं। हमें लगता है कि उनकी सही जगह जेल है लेकिन हम चाहते हैं कि आपके क्लाइंट को कुछ पैसे मिले। कोर्ट ने कहा कि आपको 15 सितंबर को पैसा जमा कराने के लिए 15 दिन दिए थे। आपको मिले समय से 7 दिन ज्यादा हो चुके हैं और आपने समय बढ़ाने के लिए कोई अर्जी भी दाखिल नहीं की है।
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राजपाल ने फिल्म बनाने के लिए लिए थे पैसे
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने की सुनवाई के दौरान कहा था कि उन्हें राजपाल पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं हैं क्योंकि उन्हें बार-बार पैसे जमा कराने के लिए कहा जा रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में उन्हें 3 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
राजपाल ने फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए साल 2010 में मुरली प्रोजेक्ट्स लीमिटेड से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। फिल्म बुरी तरह से पिट गई और उसका ब्याज बढ़कर 8 करोड़ हो गया। कंपनी ने यादव के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किया है।
