बॉलीवुड की एक्ट्रेस भाग्यश्री एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। उनके परिवार में इस वक्त विरासत को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। भाग्यश्री हाल ही में गणेश चतुर्थी के मौके पर सांगली के गणपति पंचायतन मंदिर गई थीं, जहां उन्होंने आरती की थी। आरती के बाद भाग्यश्री ने बताया कि उनके पिता विजयसिंहराजे की तबीयत ठीक नहीं थी, इस वजह से वह गणेश चतुर्थी पर सांगली आई थीं। उन्होंने साफ जाहिर किया कि वह राजघराने की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं। भाग्यश्री की इस पहल को विजयसिंहराजे पसंद नहीं आई, जिससे राजघराने पटवर्धन परिवार में विरासत को लेकर विवाद की स्थिति बन गई।
भाग्यश्री के परिवार में उत्तराधिकारी को लेकर झगड़ा छिड़ गया। जहां एक तरफ 2024 में विजयसिंहराजे ने आदित्यराजे को पटवर्धन परिवार का अगला उत्तराधिकारी बनाया था। जबकि आदित्यराजे उनके बेटे नहीं हैं। इसके बाद 2026 के गणेश चतुर्थी पर भाग्यश्री सांगली के ऐतिहासिक गणपति पंचायतन मंदिर गईं और पूजा की। इसी के साथ भाग्यश्री ने जाहिर किया कि वह परंपराओं को आगे बढ़ाना चाहती हैं। इसी बात से विरासत को लेकर परिवार में जंग छिड़ गई।
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भाग्यश्री के परिवार का झगड़ा क्या है?
इस साल गणेश चतुर्थी पर भाग्यश्री पूरे 4 साल बाद सांगली लौटी थीं। भाग्यश्री ने अपने पिता और माता की गैरमौजूदगी में पूजा-आरती की थी। इसी को लेकर विजयसिंहराजे ने विरोध किया। विजयसिंहराजे ने जाहिर किया कि उनकी गैरमौजूदगी में भाग्यश्री मंदिर की पूजा नहीं कर सकती हैं। साथ ही उन्होंने जाहिर किया कि मंदिर में पूजा करने का अधिकार उनका और उनकी पत्नी राजलक्ष्मीराजे पटवर्धन का है।
विरासत की जंग क्या है?
विजयसिंहराजे पटवर्धन ने जनवरी 2024 में आदित्यराजे को गोद लिया, जिसके बाद उन्हें सांगली वंश का उत्तराधिकारी घोषित किया। आदित्यराजे भाग्यश्री के ममेरे भाई हैं। इसके बजाय विजयसिंहराजे ने भाग्यश्री को परिवार का उत्तराधिकारी नहीं बनाया। आदित्यराजे के पिता जयदीप अभ्यंकर हैं, जो मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर हैं। विजयसिंहराजे ने साफ तौर पर बताया कि परिवार का उत्तराधिकारी सिर्फ आदित्यराजे ही हैं।
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मंदिर में हुई थी बहस
जब भाग्यश्री मंदिर गई थीं, तब कथित तौर पर उनके और मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर जयदीप के बीच बहस हुई। जयदीप कथित तौर पर नहीं चाहते थे कि भाग्यश्री मंदिर में आरती करें।जानकारी के लिए बता दें कि पटवर्धन परिवार का इतिहास मराठी पेशवाओं से जुड़ा है, जिनके पूर्वज मराठा पेशवाओं के सेनापति थे। भारतीय संघ में विलय से पहले वह सांगली रियासत के शासक थे।
