फैशन की दुनिया में पुराने कपड़ों को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। जो कपड़े पहले पहनने के बाद अलमारी में रख दिए जाते थे या किसी को दे दिए जाते थे अब उन्हें दोबारा बेचने का चलन बढ़ रहा है। इसे रिसेल या सेकेंड-हैंड फैशन कहा जाता है। थ्रेडअप 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में सेकेंड-हैंड कपड़ों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और 2030 तक इसके 393 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले सालों में युवा इस मार्केट की ग्रोथ में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

 

अब किसी पुराने कपड़े को सिर्फ इसलिए बेकार नहीं माना जाता कि उसे पहले कोई और पहन चुका है। कई युवा ऐसे कपड़े खरीद रहे हैं जो उन्हें कम कीमत में मिल जाते हैं और देखने में भी बाकी कपड़ों से अलग होते हैं। वहीं कुछ लोग अपनी पुरानी वार्डरोब को खाली करने के लिए कपड़े बेच रहे हैं। इस तरह एक कपड़ा एक व्यक्ति की अलमारी से निकलकर दूसरे व्यक्ति की वार्डरोब तक पहुंच रहा है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने इस काम को और आसान बना दिया है। अब लोग घर बैठे कपड़ों की फोटो या रील डालकर उन्हें बेच सकते हैं।

 

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भारत में भी बढ़ रहा सेकेंड-हैंड फैशन

भारत में भी यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। मई 2026 की गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेकेंड-हैंड क्लोदिंग मार्केट करीब 33,000 करोड़ रुपये सालाना का है। रिपोर्ट में दिल्ली समेत कई जगहों के ऐसे युवा सेलर्स का जिक्र है जो इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए थ्रिफ्ट और विंटेज कपड़े बेच रहे हैं।

 

गार्डियन के मुताबिक, दिल्ली के विशु रॉय ने करीब 5,000 से 10,000 रुपये की बचत से थ्रिफ्ट कपड़ों का काम शुरू किया था। वह इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर कपड़ों की तस्वीरें और रील डालकर उन्हें बेचते थे। बाद में उन्होंने सरोजिनी नगर के पास अपनी छोटी दुकान भी शुरू की। वहीं जम्मू के अभिन बौगिया ने अपने कजिन के साथ करीब 1,000 रुपये से यह काम शुरू किया था। दोनों बाजार से कपड़े खरीदकर उनकी फोटो इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर डालते थे और फिर उन्हें बेचते थे। इस तरह अब पुराने कपड़े सिर्फ अलमारी खाली करने की चीज नहीं रह गए हैं। कई लोगों के लिए यह कमाई का जरिया भी बन रहे हैं। कोई अपने पुराने कपड़े बेच रहा है तो कोई कम कीमत में कपड़े खरीदकर उन्हें आगे बेच रहा है।

 

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सोशल मीडिया बना दुकान

रिसेल फैशन में सोशल मीडिया का रोल काफी बड़ा हो गया है। छोटे सेलर्स के लिए इंस्टाग्राम किसी दुकान की तरह काम कर रहा है। वे कपड़ों की फोटो और रील डालते हैं और पसंद आने पर कस्टमर व्हाट्सऐप के जरिए उनसे संपर्क करता है। थ्रेडअप की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, करीब आधे शॉपर्स सोशल मीडिया, क्रिएटर्स और दूसरे ऑनलाइन फीड के जरिए सेकेंड-हैंड कपड़े खोज रहे हैं।

 

हालांकि रिसेल का काम हमेशा आसान नहीं होता। गार्डियन की रिपोर्ट में सेलर्स ने बताया है कि कभी-कभी कपड़े लंबे समय तक नहीं बिकते। फेक पेमेंट, रिटर्न और सोशल मीडिया पर कम रीच जैसी परेशानियां भी सामने आती हैं। जेन जी और मिलेनियल्स भी इस मार्केट को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। थ्रेडअप की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक रिसेल मार्केट की ग्रोथ में जेन जी और मिलेनियल्स की हिस्सेदारी 71% रहने का अनुमान है। युवा कम कीमत के साथ-साथ यूनिक और विंटेज कपड़ों की वजह से भी रिसेल की तरफ जा रहे हैं।