गुजरात में चंदीपुरा वायरस का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह वायरस खास तौर पर बच्चों के लिए बहुत खतरनाक है। इस वजह से राज्यसभा में भी चिंता जताई गई है। भारतीय जनता पार्टी नेता बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने सोमवार को शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सरकार से वायरस रोकने के लिए बड़े पैमाने पर निगरानी और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की।
बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने कहा कि समय रहते सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में अब तक इस वायरस से 23 बच्चों की मौत हो चुकी है। चंदीपुरा वायरस का कोई खास इलाज अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए जल्दी बीमारी पकड़ना, लगातार निगरानी रखना और समय पर इलाज कराना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बच्चों में फैलने वाले संक्रमण को लेकर खास चिंता जताई।
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किन लोगों पर ज्यादा खतरा है?
यह वायरस मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए वे आसानी से संक्रमित हो जाते हैं। बच्चे बाहर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे संक्रमित मक्खियों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है।
कब जानलेवा हो जाती है बीमारी?
कुपोषण, भीड़भाड़ और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से खतरा और बढ़ सकता है। यह बीमारी अन्य वायरल संक्रमणों से अलग है। यह धीरे-धीरे नहीं बढ़ती, बल्कि जल्दी गंभीर हो जाती है।
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लक्षण क्या दिखते हैं?
बच्चों में पहले बुखार आता है, फिर तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (मस्तिष्क की सूजन) हो सकता है। इससे दौरे पड़ सकते हैं, बेहोशी हो सकती है और अगर तुरंत इलाज न मिले तो 24 से 48 घंटों में मौत भी हो सकती है।
क्या चाहती हैं विधायक?
भारतीय जनता पार्टी नेता के विधायक बाबूभाई जेसंगभाई देसाई सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिलकर ठोस कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने रिसर्च बढ़ाने, वैक्सीन और इलाज विकसित करने पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में बच्चों को इस बीमारी से बचाया जा सके।
