टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को डेंगू बुखार सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकता है। लगातार हाई ब्लड शुगर रहने से इन मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और रक्त वाहिकाएं भी क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इससे डेंगू वायरस से लड़ने की क्षमता घट जाती है और बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. ज्योतिदेव केशवदेव के नेतृत्व में तैयार किए गए एक शोध पत्र में यह बात सामने आई है। इस शोध में देश के कई प्रमुख डायबिटीज विशेषज्ञों और इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (यूरोप) की निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. नीति पाल ने भी योगदान दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब ब्लड वेसल्स ठीक से काम नहीं कर पातीं तो टाइप-2 डायबिटीज वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है।

 

क्यों बढ़ जाता है खतरा?

टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है। इससे इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। डेंगू होने पर शरीर कभी-कभी वायरस से लड़ने के लिए जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देता है, जिसे साइटोकाइन स्टॉर्म कहा जाता है। इसमें शरीर में सूजन बढ़ जाती है, ब्लड प्रेशर गिर सकता है और कई अंग प्रभावित हो सकते हैं।

 

डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं। इनका काम खून में थक्का बनाना होता है। ये कोशिकाएं वही हैं। अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में न हो तो प्लेटलेट्स और भी तेजी से कम होते हैं। इससे ब्लीडिंग, शरीर में पानी की कमी, कम ब्लड प्रेशर, किडनी और लीवर संबंधी समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है।

ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • प्लेटलेट्स लगातार गिरना
  • नाक या मसूड़ों से खून आना
  • शरीर पर लाल धब्बे
  • तेज पेट दर्द
  • बार-बार उल्टी
  • बहुत ज्यादा कमजोरी

डेंगू से बचाव के लिए डायबिटीज मरीज क्या करें?

दिन में 3-4 बार ब्लड शुगर चेक करें, क्योंकि बीमारी में शुगर अचानक बढ़ या घट सकता है। भरपूर पानी, नारियल पानी और छाछ पिएं। पैकेट वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक्स से बचें। बुखार के लिए सिर्फ पैरासिटामोल लें। एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी दवाएं न लें, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है।

 

पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी या खून आने पर तुरंत अस्पताल जाएं। आराम करें और हल्का खाना खाएं जैसे खिचड़ी, दलिया या उबली हुई सब्जियां। डॉक्टरों की सलाह है कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीज डेंगू के मौसम में खास सावधानी बरतें और ब्लड शुगर को अच्छे से कंट्रोल रखें। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।