ईरान युद्ध अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इसके लिए अमेरिका और ईरान अभी भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। इस बीच अमेरिका और ईरान ने लेबनान में मिलिट्री ऑपरेशन खत्म करवाने के लिए एक 'डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल' बनाने पर सहमत हुए हैं। इस सेल का मतलब है कि तनाव को नियंत्रित करने के लिए समन्वय तंत्र बनाया जाएगा। दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में ईरान युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए हाई लेवल बैठक सोमवार को समाप्त हो गईं।

 

मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि इस 'डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल' में लेबनान की सरकार भी शामिल होगी। इसका मकसद लेबनान में सैन्य अभियानों की समाप्ति के समझौते का पालन सुनिश्चित करना होगा।

 

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हिजबुल्ला-इजरायल की स्थिति स्पष्ट नहीं

हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला और इजरायल के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए पर्याप्त साबित होगी या नहीं। इजरायल का लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा है और उसका कहना है कि उन चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए जो उत्तरी इजरायल पर हमले करते हैं। 

 

 

 

अब्बास अराघची ने अपनी बात सामने रखी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार सुबह स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कोशिशों से महत्वपूर्ण प्रगति हासिल हुई है। अब्बास अराघची ने यह संदेश सोशल मीडिया मंच एक्स पर दिया। पाकिस्तान, कतर और ईरान तीनों देशों ने हाई लेवल बातचीत के पहले दौर के समाप्त होने की पुष्टि की है। हालांकि, अमेरिका की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

 

 

 

 

अपने संदेश में अराघची ने कहा कि वार्ता में बनी सहमतियों की पहली वास्तविक परीक्षा लेबनान में इजरायल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए गठित होने वाले डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल की होगी।

इजरायल क्या कह रहा है?

ईरान ने इन वार्ताओं की सफलता को लेबनान में जारी लड़ाई की समाप्ति से जोड़ा है। वहीं, इजरायल का कहना है कि वह लेबनानी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा और हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए। इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्ला उत्तरी इजरायल पर लगातार हमले कर रहा है, इसलिए उसके विरुद्ध सैन्य कार्रवाई जारी रखना जरूरी है।

 

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ट्रंप की धमकियों पर ईरानी प्रतिक्रिया

वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण माहौल में और 60-दिवसीय कूटनीतिक प्रक्रिया के रूप में हुई है, जिसका मकसद ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी समझौते तक पहुंचना है। हालांकि, लेबनान में जारी संघर्ष अब भी प्रमुख अड़चनों में से एक बना हुआ है। इस बीच, ईरान ने दावा किया कि उसने सप्ताहांत के दौरान फिर से होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। वहीं अमेरिका ने कहा कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रही।

 

स्विट्जरलैंड में रविवार को वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण माहौल में हुई, जब ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों और ईरान के राष्ट्रपति के संबंध में दिए गए बयान को लेकर आपत्ति जताई। ट्रंप ने कहा था कि ईरान के राष्ट्रपति को अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए।