अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने अमेरिका की एक अदालत के फैसले का स्वागत किया है। इस फैसले में उनके खिलाफ आपराधिक आरोप हटा दिए गए हैं। गौतम अडाणी ने कहा कि वे इस फैसले का सम्मान करते हैं और न्यायिक प्रक्रिया पर उनका पूरा भरोसा है।
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित एक अदालत के जज निकोलस गारौफिस ने गौतम अडाणी और सागर अडाणी के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोप खारिज कर दिए। यह फैसला सोमवार को आया। जज ने कहा कि वे संतुष्ट हैं कि अडाणी ग्रुप के किसी निवेश के वादे का इस फैसले पर कोई असर नहीं पड़ा।
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DoJ ने खुल केस वापस लेने की पहल की थी
अदालत ने यह भी साफ किया कि आरोप वापस लेने के फैसले में जजों की भूमिका सीमित होती है। ये आरोप भारत में सोलर पावर के ठेकों से जुड़े कथित रिश्वत के मामले और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने के आरोपों पर आधारित थे। मई में अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ),ने खुद इन आरोपों को वापस लेने की अपील की थी।
क्यों अमेरिका पीछे हट गया?
जुलाई में DoJ ने अदालत को बताया कि यह मामला कभी दायर ही नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पूरा मामला भारत से जुड़ा है। भारतीय लोगों के बीच कथित रिश्वत, भारतीय ठेके और भारत में बिजली आपूर्ति से संबंधित है। इसलिए इसे अमेरिका की बजाय भारत खुद बेहतर तरीके से संभाल सकता है। अमेरिकी संसाधनों को घरेलू मुद्दों पर लगाना ज्यादा सही है।
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किस कानून की आलोचना अदालत ने की?
अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी कहा कि सिक्योरिटीज फ्रॉड के आरोप कानूनी रूप से कमजोर थे और इन्हें कभी नहीं लगाया जाना चाहिए था। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन करते हुए साफ किया कि किसी संभावित निवेश का इस फैसले से कोई संबंध नहीं है।
गौतम अडाणी ने क्या कहा?
अडाणी ने अपने बयान में कहा कि इस मुश्किल समय में सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन पर उनका विश्वास बना रहा। उन्होंने उन लोगों का आभार जताया जिन्होंने उन पर, सिस्टम पर और भारत की न्याय क्षमता पर भरोसा नहीं खोया। उन्होंने कहा कि अडाणी ग्रुप राष्ट्र निर्माण में योगदान देता रहेगा।
