इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान में अपनी जड़ें कभी अंदर तक जमा ली है। मोसाद के एजेंटों से मिली सटीक जानकारी ने तेहरान की शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने में मदद की। पूरे ईरान में मोसाद के एजेंटों का खौफ है। अब ईरान की सरकार इजरायल के एजेंटों को चुन-चुनकर खोज रही है। हाल ही में ईरान ने दावा किया कि उसने मोसाद से जुड़े 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। तेहरान के इंटेलिजेंस मंत्रालय ने इन्हें भाड़े का एजेंट बताया।
ईरान की सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB की रिपोर्ट के अनुसार सभी लोगों को दक्षिण-पूर्वी केरमान प्रांत में पकड़ा गया है। ईरान के इंटेलिजेंस मंत्रालय ने बताया कि 30 लोगों को इजरायल की मोसाद खुफिया एजेंसी से संबंध रखने और सैन्य और हवाई रक्षा स्थलों पर जानकारी इकट्ठा करने समेत विभिन्न आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों में इन लोगों ने हिस्सा लिया था।
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मोसाद का जासूस बता दो लोगों की दी फांसी
ईरान ने 3 अगस्त को ही इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को फांसी दी। पिछले साल के विरोध प्रदर्शन और युद्ध के बीच ईरान में प्रदर्शनकारियों को लगातार फांसी दी जा रही है। ईरान की न्यायपालिका ने ओमिद बेहजाद और पूरिया सफवत को 3 अगस्त को फांसी दी। इससे पहले उन्हें मोसाद के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया। यह भी कहा गया कि इन लोगों ने मोसाद को संवेदनशील जानकारी भेजी।
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक दुनियाभर में चीन के बाद सबसे अधिक फांसी ईरान में दी जाती हैं। ईरान ह्यूमन राइट्स और टुगेदर अगेंस्ट द डेथ पेनल्टी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में पिछले साल कम से कम 1,639 लोगों को फांसी दी गई। यह 1989 के बाद से सबसे अधिक आंकड़ा है।
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प्रदर्शन में गई हजारों लोगों की जान
पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी में ईरान में महंगाई के खिलाफ जनता का गुस्सा फूटा। 10 विश्वविद्यालयों के छात्रों समेत आम जनता सड़क पर उतर आई। हिंसक विरोध प्रदर्शन के खिलाफ ईरानी सुरक्षा बलों ने दमन का रास्ता चुना। कई पश्चिमी मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया कि ईरानी बलों ने 30 से 60 हजार लोगों को मारा। हालांकि ईरान आधिकारिक तौर पर 3117 मौतों को स्वीकार करता है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गुरुवार को एक इंटव्यू में कहा कि विरोध प्रदर्श के दौरान हजारों लोग मारे गए थे। उन्होंने कहा कि 3000 लोगों की जान गई और आरोप लगाया कि देश के बाहर बैठे लोगों ने आंकड़े को 30 से 40 हजार कर दिया।
