ईरान को भी मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है। इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सोमवार को तेहरान की यात्रा पर जाएंगे। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई के मुताबिक आसिम मुनीर की इस यात्रा का लक्ष्य द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को मजबूत करना है। 

 

इस बीच लेबनान की राजधानी बेरूत से चलने वाले अल मायादीन चैनल ने अपनी रिपोर्ट में ईरानी संसद की समाचार एजेंसी खानेह मेल्लत के मुखिया मेहदी रहीमी के हवाले से बताया कि ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है। तेहरान में इस पर विचार किया जा रहा है। मेहदी रहीमी ने आगे कहा कि क्षेत्रीय देश एक क्षेत्रीय सुरक्षा छत्र की तलाश की ओर बढ़ रहे हैं। ईरान लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। यह ईरान की जीत है।

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल में शुरू होगी 'शी ट्रैवल योजना', महिला पर्यटकों को होगा लाभ

 

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में डिफेंस पैक्ट किया था। इसमें एक देश पर हमला सभी पर हमला मानने का प्रावधान है। ठीक वैसे ही, जैसे नाटो के आर्टिकल-5 में है। पाकिस्तान और तुर्की की रणनीति रक्षा समझौते में अधिक से अधिक मुस्लिम देशों को शामिल करने की है। मिस्र और बांग्लादेश के साथ भी बातचीत चल रही है।

समझौते को कैसे देखता है ईरान?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की है। इससे पहले 10 अगस्त को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा था कि तेहरान के लिए चिंता की कोई वजह नहीं है। यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र बनाने की जरूरत के प्रति क्षेत्र के देशों के बीच बढ़ती मान्यता को दिखाता है।

 

यह भी पढ़ें: पंखे पर लटकती मिली रक्षा मंत्रालय अधिकारी की लाश, ससुराल वालों पर लगे गंभीर आरोप

मक्का समझौते का समन्वय तंत्र किया जा रहा विकसित

पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने समझौते के तहत सैन्य समन्वय तंत्र विकसित करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा विदेश मंत्रियों, रक्षा मंत्रियों और सैन्य कमांडरों की बैठक व संयुक्त सैन्य अभ्यास का खाका खींचा जा रहा है। आने वाले समय में कुछ और मुस्लिम देश मक्का समझौते का हिस्सा होंगे। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और विदेश मंत्री हाकान फिदान खुलकर मिस्र का नाम ले चुके हैं। संभावना भी जताई कि मिस्र समझौते का हिस्सा बन सकता है।