ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को उन्होंने निशाना बनाया गया है। ईरान के लारक द्वीप पर अमेरिका ने हमला किया, जिसका जवाब अब अमेरिका को महंगा पड़ा है। करीब 1 महीने से थोड़ी स्थिरता के संकेत जिस मध्य पूर्व से नजर आ रहे थे, वहां से एक बार फिर तबाही और जंग की तस्वीरें सामने आ रहीं हैं।
IRGC ने कहा है कि पहले किंग हुसैन और अल अरकज सैन्य बेस को निशाना बनाया गया। ईरान ने कहा है कि यह हमले, सिर्फ गुनहगार को सजा देने के मकसद से किए गए हैं। IRGC ने दावा किया है कि जिन-जिन इलाकों से दुश्मन ने हमला किया है, उन्हें तबाह किया गया है।
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इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स:-
आक्रामकता और अपराध होर्मुज स्ट्रेट पर इस्लामी गणराज्य के नियंत्रण को कमजोर करने के प्रयास में दुश्मन की हताशा नहीं खत्म कर सकते हैं। हर हमले का और भी विनाशकारी जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका ने लारक आइलैंड को क्यों निशाना बनाया?
अमेरिका का कहना है कि ईरान के लारक आइलैंड पर हमला इसलिए किया क्योंकि वहां IRGC की सेनाएं होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरंगों वाले रॉकेट दागने की तैयारी कर रही थीं। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने आइलैंड पर दो ईरानी लॉन्चरों को निशाना बनाया।
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क्यों खास है लारक आइलैंड?
लारक आइलैंड होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद है। यह दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 5 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। अमेरिका का कहना है कि वह इस रास्ते पर व्यापार की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठा रहा है।
नई झड़प की कहानी क्या है?
अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से समुद्री सुरंगें साफ किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि कोई गतिविधि अगर इस तरह की हुई तो तत्काल जहाज को तबाह करेंगे। एक महीने से ईरान और अमेरिका एक-दूसरे से सीधी तरह नहीं टकरा रहे थे। अब ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। दावा किया जा रहा है कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को नाकाम कर दिया है।
