अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने बंधुआ मजदूर वाले अपने बयान पर सफाई दी। वैंस ने कहा कि अमेरिका में योगदान देने वाले लोगों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने अमेरिकी आप्रवासन प्रणाली में संतुलन बनाने की अपील भी की। ट्रंप प्रशासन ने इसी महीने टीसीएस, विप्रो, एसचीएल और इंफोसिस जैसी भारतीय आईटी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) से सस्पेंड कर दिया है।
उस वक्त जेडी वैंस ने कहा था कि अमेरिकी कंपनियों को अधिक अमेरिकी श्रमिकों को नियुक्त करना चाहिए था। ऐसे काम के लिए बंधुआ मजदूरों का आयात रोकने चाहिए। उनके इसी बयान पर हंगामा मच गया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी जेडी वैंस के बयान की आलोचना की थी और इसे तथ्यों से परे बताया था।
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आप प्रवासियों को बलि का बकरा क्यों बना रहे?
जब वैंस से एक भारतीय-अमेरिकी ने पूछा कि आपने H-1B वर्करों को 'बंधुआ मजदूर' कहा। आप प्रवासियों को बलि का बकरा क्यों बना रहे हैं? जवाब में जेडी वेंस ने कहा, 'आप जानते हैं कि मेरा परिवार कहां से आता है और मैं अपनी सास और ससुर से बहुत प्यार करता हूं... जो दक्षिण भारत से आकर यहां बसे थे और जाहिर है कि उनकी बेटी, जो अमेरिका में पैदा हुई थी, अब दूसरी महिला हैं और मुझे उन पर बहुत गर्व है, और मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं।'
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आव्रजन सिस्टम में संतुलन बनाना होगा: वैंस
वैंस ने आगे कहा, 'मेरा मानना है कि हम उन लोगों का सम्मान और स्वागत कर सकते हैं, जो अमेरिका में योगदान देना चाहते हैं। मुझे लगता है कि हम सही तरीके से संतुलन बना सकते हैं। मेरा मानना है कि हमारी आव्रजन प्रणाली को संतुलित होना ही होगा।'
वैंस के बयान पर भारत ने क्या कहा था?
जेडी वैंस के बयान पर 9 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, 'हमारा मानना है कि ऐसी बातें अनुचित हैं। इस तथ्य को नजरअंदाज करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित और कुशल हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन इकोसिस्टम में योगदान देते हैं। वास्तव में अमेरिका का इतिहास खुद आप्रवासियों की पीढ़ियों ने आकार दिया। उनकी मेहनत, उद्यम और इनोवेशन ने विकास और समृद्धि में योगदान दिया। ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल करना, जिसमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की भावनाएं जुड़ी हों, बेहद आपत्तिजनक है।'
