साल 2025 में दुनिया कई संघर्षों की गवाह बनी। भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों का टकराव चला। कंबोडिया और थाईलैंड की जंग में 101 लोगों की जान गई। वहीं पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा संघर्ष में दर्जनों लोगों की मौत हुई। इजरायल और हमास के बीच जंग थमी नहीं है। वहीं यूक्रेन में रूसी मिसाइलें कहर बरपा रही हैं। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के एक साथ हमले से दुनिया पहले ही सन्न हो चुकी है। अब दोबारा हमले की तैयारी की जा रही है। 2026 में भी कई इलाकों में जंग का खतरा है। कई देशों के बीच तनातनी बरकरार है। आशंका है कि 2026 में दुनिया के कई क्षेत्रों में संघर्ष का एक नया दौर शुरू हो सकता है। आइये एक नजर डालते हैं दुनिया के हॉटस्पॉट इलाकों पर...

 

चीन-ताइवान: हाल ही में पेंटागन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन का इरादा 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने का है। उससे पहले ही चीन ताइवान के चारों तरफ सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास कर रहा है। इसमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की तीनों विंग शामिल हैं। जवानों को ताइवान की नाकेबंदी और बाहरी हस्तक्षेप से निपटने की ट्रेनिंग दी जा रही है। कम्युनिस्ट पार्टी की सेना लगातार गोलाबारी का अभ्यास कर रही है। नौसेना पनडुब्बी रोधी और वायुसेना एयर स्ट्राइक में अपने हाथ आजमा रही है। चीन दुनिया के सामने ताइवान पर कब्जे करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है।

 

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अमेरिका-वेनेजुएला: मौजूदा समय में अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते बेहत तल्खी भरे हैं। डोनाल्ड ट्रंप लगातार वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बढ़ाते जा रहे हैं। बुधवार को भी अमेरिका ने वेनेजुएला की चार तेल कंपनियों से जुड़े तेल टैंकरों पर प्रतिबंध लगा दिया। इससे पहले अमेरिकी नौसेना प्रशांत महासागर और कैरेबियन सागर में ड्रग्स तस्करी के कथित आरोपों के बाद वेनेजुएला के कई तेल टैंकरों को जब्त कर चुकी है। वहीं दर्जनों नावों पर एयर स्ट्राइक भी की जा चुकी है। अमेरिका अब वेनेजुएला की नाकेबंदी में जुटा है। ट्रंप किसी भी तरह निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाना चाहते हैं। उन्होंने जमीनी कार्रवाई तक की धमकी है।  

 

इजरायल-ईरान: 2025 में इजरायल और ईरान के बीच 13 जून से 24 जून तक 12 दिनों की जंग चली। इजरायल ने ईरान के कई सैन्य अधिकारियों और टॉप वैज्ञानिकों को मारा। इसके अलावा कई परमाणु ठिकानों पर सटीक हमलों को अंजाम दिया। ईरान ने 550 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइल और 1,000 से अधिक ड्रोन हमलों से इजरायल को जवाब दिया। अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर नतान्ज, इस्फहान और फोर्डो परमाणु प्लांट पर हमला किया। अब खबरें आ रही हैं कि इजरायल दोबारा ईरान पर हमले की तैयारी में है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी अमेरिका यात्र के दौरान पूरा प्लान ट्रंप के साथ साझा किया। ट्रंप ने भी कहा कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करता है तो अमेरिका सैन्य हमला कर सकता है।

 

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युद्ध क्षेत्र में बदल सकता यमन: मध्य पूर्व का देश यमन पिछले एक दशक से गृहयुद्ध की चपेट में है। मगर आशंका जताई जा रही है कि यह इलाका 2026 में क्षेत्रीय शक्तियों के वर्चस्व स्थली बन सकता है। यमन के ठीक सामने सोमालीलैंड नाम के देश को इजरायल ने मान्यता दी है। अब अगर हूती विद्रोहियों ने यमन से इजरायल पर हमला किया तो इजरायल भी पड़ोस से जवाब देने की भूमिका में आ गया है। इसके अलावा यमन के मामले पर ही सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात आमने-सामने हैं। वहीं हूती विद्रोहियों का समर्थक ईरान भी अपना वर्चस्व बरकरार रखने की पूरी कोशिश करेगा। ऐसे में यमन के रणभूमि बनने के खतरे अधिक हैं।

 

पाकिस्तान-अफगानिस्तान: अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा पर बेचैन करने वाली शांति है। एक हरकत से यहां हालात बिगड़ सकते हैं। पिछले साल दोनों देशों के बीच करीब तीन बार संघर्ष की स्थिति बनी। हालांकि मध्यस्थता से मामला हल कर लिया गया, लेकिन अंदर ही अंदर आग धधक रही है। अफगानिस्तान पर पाकिस्तान टीटीपी को शरण देने का आरोप लगाता है। हालांकि इन आरोपों को तालिबान खारिज करता है। वहीं दूसरी तरफ टीटीपी लगातार पाकिस्तान सेना को अपना निशाना बना रही है। ऐसे में टीटीपी की एक हरकत से दोनों देशों के बीच जंग छिड़ सकती है।  

 

भारत-पाकिस्तान: भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तनाव भरे हैं। आतंकवाद के मामले पर भारत का रुख बेहद सख्त है। वहीं पाकिस्तान कश्मीर में अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। 2025 के मई महीने में चार दिन के संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनाव भरे हैं। हाल ही में अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने कहा कि कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच 2026 में जंग छिड़ सकती है।

 

थाईलैंड और कंबोडिया: पिछले साल थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दो बार जंग छिड़ी चुकी है। दोनों देश एक-दूसरे की जमीन पर दावा ठोकते हैं। दशकों पुराना यह मामला अब एक बार फिर उभर आया है। दिसंबर महीने में हुई झड़प में 101 लोगों की जान गई और 10 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। हालांकि मलेशिया और अमेरिकी मध्यस्थता से दोनों के बीच सीजफायर हो गया है। मगर थाईलैंड ने कंबोडिया पर सीजफायर के उल्लंघन का आरोप लगाया है। दोनों देशों के बीच भड़की यह आग सिर्फ दबी है, बुझी नहीं।