नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार 26 अगस्त की सुबह अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। यह बाढ़ चीन की सीमा से लगे रसुवा जिले से होकर बहने वाली भोटेकोशी नदी में आई, जहां बर्फ, पत्थर और मलबे का भारी सैलाब भोटेकोशी नदी में उतरा और तिमुरे, स्यबरुबेसी जैसे कस्बों को तबाह करता हुआ आगे बढ़ गया। 

 

आशंका जताई जा रही है कि नेपाल में GLOF (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) यानी ग्लेशियर की झील के अचानक फटने की वजह से बाढ़ आई। वैज्ञानिक अभी इसकी पुष्टि करने में जुटे हैं कि यह तबाही किसी ग्लेशियर झील के फटने से आई, या किसी और वजह से आई है। 

 

यह भी पढ़ें: 'पहली बार पुलिस ने घर से उठाकर सम्मानित किया', CM फडणवीस के सामने बोले समय रैना

GLOF है क्या? 

दरअसल, ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ के बड़े ढेर होते हैं, जिन्हें ग्लेशियर कहा जाता है। सालों तक इसमें पत्थर-मिट्टी का मलबा जमा होता रहता है। जब ग्लेशियर पिघलकर पीछे खिसकता है, तो यह मलबा उसके सबसे निचले सिरे पर जमा होकर एक दीवार बना देता है, जिसे मोरेन कहते हैं। यह मोरेन-दीवार, ग्लेशियर के पिघले पानी को रोक लेती है। इससे धीरे-धीरे एक झील बन जाती है। यह दीवार पक्की नहीं होती, सिर्फ ढीली मिट्टी-पत्थर-बर्फ से बनी होती है।

 

ऐसे में जब पानी लगातार बढ़ता जाता है तो दीवार खुद कमजोर होकर टूट जाती है या फिर कोई बड़ा पत्थर-बर्फ का टुकड़ा झील में गिर जाए, जिससे उठी लहर दीवार तोड़ देती है। इसके अलावा, लगातार बारिश की वजह से पानी का स्तर बढ़ने और धीरे-धीरे दीवार कमजोर होने की वजह से भी दीवार टूट सकती है। दीवार टूटने की स्थिति में झील का सारा पानी मिट्टी-पत्थर-बर्फ के साथ बहुत तेज रफ्तार से नीचे बहने लगता है। इसे ही GLOF कहते हैं।  

GLOF कब बन जाता है खतरा? 

केवल पानी से तबाही नहीं, बल्कि पानी के साथ बहकर आने वाले बड़े पत्थर, कीचड़, बर्फ भी भारी तबाही लाता है। यह GLOF से ही बनता है। यही मलबा रास्ते में आने वाले घर, पुल, सड़क सब तबाह कर देता है। 

हिमालय में खतरा, भारत के लिए नई चिंता? 

एक रिसर्च संस्था (ICIMOD) के मुताबिक 1970 के दशक से हिमालय के ग्लेशियर लगातार पतले और छोटे होते जा रहे हैं, और अब बर्फ पिघलने की रफ्तार साल 2000 के मुकाबले दोगुनी हो चुकी है। हर बार जब कोई ग्लेशियर पीछे हटता है, ऐसे में वहां नई झील बन सकती है। दूसरी ओर पुरानी झीलें और बड़ी होती जाती हैं। ISRO के मुताबिक हिमालय में करीब 2,431 बड़ी ग्लेशियर झीलें हैं, इनमें से 676 पिछले कुछ दशकों में काफी बड़ी हो चुकी हैं। भारत में ऐसी 130 झीलें हैं।

 

यह भी पढ़ें: Nepal Floods: कब, कहां और कैसे आई नेपाल में विनाशकारी बाढ़? भारत में कहां खतरा?

सिक्किम, केदारनाथ की आपदा  

नेपाल ही नहीं, भारत में भी GLOF ने भारी तबाही मचाई है। साल 2023 में सिक्किम के साउथ ल्होनक में मोरेन यानी मिट्टी-पत्थर की दीवार का एक हिस्सा जो सालों से खिसक रहा था, झील में गिर गया। इसकी वजह से झील फट गई है। इस आपदा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ था। इसके अलावा, इसरो और मौसम विभाग के विश्लेषणों के अनुसार, केदारनाथ में आपदा भी मुख्य कारणों में GLOF और भारी बारिश के मिले-जुले असर से आई थी।