नेपाल की राजनीति इस समय भारी उथल-पुथल से गुजर रही है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के एक बयान के बाद देशभर में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। संसद में भारत-नेपाल सीमा विवाद पर चर्चा के दौरान दिए गए उनके बयान को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और उनके इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है।

 

कुछ समय पहले तक व्यापक जनसमर्थन के साथ सत्ता में आए बालेन शाह अब अपने ही कार्यकाल में विरोध का सामना कर रहे हैं। विवाद के केंद्र में भारत-नेपाल सीमा के कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र हैं, जिन्हें लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद चला आ रहा है।

 

यह भी पढ़ें: US के शहरों में करोड़ों मच्छर क्यों छोड़ने वाला है Google? हैरान कर देगा प्लान

संसद में बयान से बढ़ा विवाद

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में चर्चा के दौरान कहा कि सीमा विवाद पूरी तरह एकतरफा नहीं है और नेपाल की तरफ से भी कुछ स्थानों पर सीमा पार होने की घटनाएं हुई हैं। उनके इस बयान को कई राजनीतिक दलों ने नेपाल के राष्ट्रीय रुख के खिलाफ माना, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ गया।

काठमांडू में सड़क पर उतरे छात्र और विपक्ष

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बयान के बाद काठमांडू में छात्र संगठनों ने 'हमारी संप्रभुता बचाओ' के नारे के साथ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री पर 'देश विरोधी बयान' देने का आरोप लगाया। इसके साथ ही विपक्षी दलों और राजनीतिक संगठनों ने भी रैलियां निकालकर उनके इस्तीफे की मांग को तेज कर दिया। संसद में भी इस मुद्दे पर हंगामा देखने को मिला, जहां विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री से माफी मांगने और बयान वापस लेने की मांग की।

 

यह भी पढ़ें: चीनी सीमा के पास दहला म्यांमार; 100 से ज्यादा घर उड़े, 45 से अधिक मौतें, 70 घायल

विदेश मंत्रालय की सफाई के बावजूद तनाव कायम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाद में बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री के शब्दों को गलत तरीके से समझा गया है और उनका आशय केवल स्थानीय सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों से था। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद पर तकनीकी स्तर पर बातचीत पहले से चल रही है। हालांकि इस सफाई के बावजूद राजनीतिक तनाव कम नहीं हुआ और विरोध प्रदर्शन जारी रहे।