हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच जंग तेज हो गई है। पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का समझौते को भी सक्रिय कर दिया है। सोमवार को ही पाकिस्तान ने तुर्की के साथ अपने सैनिकों को यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ तैनात करने का एलान कर दिया। अब पाकिस्तान के सीधे जंग में उतरने से खतरा भारत के दरवाजे तक संघर्ष छिड़ने का है। हूती विद्रोही पहले भी पाकिस्तान को दूर रहने की सलाह दे चुके हैं। पाकिस्तान के सैन्य हस्तक्षेप से इस्लामाबाद को मध्य-पूर्व संघर्ष में घसीटे जाने का खतरा बढ़ गया है।
पाकिस्तान और तुर्की के युद्ध में शामिल होने की घोषणा के बाद हूती विद्रोहियों ने पूर्ण पैमाने पर युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि हूती विद्रोही पाकिस्तान के सैन्य हस्तक्षेप के जवाब में कराची या ग्वादर जैसे रणनीतिक बंदरगाहों को निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा हिंद महासागर, लाल सागर और होर्मुज की खाड़ी में पाकिस्तान के खिलाफ नाकेबंदी की जा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान और हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग समुद्र क्षेत्र में छिड़ सकती है।
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क्या छिड़ जाएगी शिया और सुन्नी की जंग?
यमन के हूती विद्रोहियों को ईरान का खुला समर्थन है। हूतियों का संबंध शिया मुस्लिम संप्रदाय से है, जबकि सऊदी अरब के साथ खड़े पाकिस्तान और तुर्की का संबंध सुन्नी संप्रदाय से है। दुनियाभर में इस जंग को शिया और सुन्नी की नजरों से भी देखा जा रहा है। पाकिस्तान में शिया मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है। खासकर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, कराची और खैबर पख्तूनख्वा में। हूती विद्रोहियों के खिलाफ पाकिस्तान का ताजा कदम देश के भीतर ही संघर्ष की नई लहर पैदा कर सकता है।
इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि फरवरी में जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था तब पाकिस्तान के कराची में शिया मुसलमानों ने अमेरिकी दूतावास पर भारी तोड़फोड़ की थी। पुलिस की गोलीबारी में 32 लोगों की जान गई थी।
ईरान भी सीधे जंग में कूद सकता है
मक्का गठबंधन की कार्रवाई से अगर हूती विद्रोहियों की यमन में पकड़ कमजोर पड़ती है तो ईरान सीधे जंग में कूद सकता है। 2019 में हूती विद्रोहियों पर हमले के जवाब में ईरान ने सऊदी अरब पर मिसाइलों से अटैक किया था। अगर तेहरान अबकी बार भी सऊदी अरब पर हमला करता है तो क्या इस्लामाबाद अपने पड़ोसी से भिड़ेगा? एक खतरा यह भी है कि ईरान बाकी खाड़ी देशों की तर्ज पर ही पाकिस्तान के खिलाफ भी मोर्चा खोल सकता है।
क्या काम आएगी पाकिस्तान की परमाणु शील्ड
तुर्की और सऊदी अरब पूरे मामले को इस तरह प्रचारित कर रहे हैं कि परमाणु शक्ति पाकिस्तान यमन में सक्रिय हो गया है। दोनों ही देश पाकिस्तान के परमाणु क्षमता को निवारक कदम के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन परमाणु शक्ति से भिड़ना ईरान के लिए कोई नहीं बात नहीं है। तेहरान पिछले छह माह से अमेरिका और इजरायल जैसे परमाणु संपन्न देशों से जंग लड़ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान से भिड़ना बड़ी बात नहीं होगी।
अलग-थलग पड़ सकता है इस्लामाबाद
पाकिस्तान में भी मक्का पैक्ट को लेकर तमाम तरह की बातें होने लगी हैं। विश्लेशकों का मानना है कि पाकिस्तान बेवजह संघर्ष में घसीटा जा सकता है। इस्लामाबाद ईरान और यमन के दलदल में फंस सकता है। अगर पड़ोसी ईरान से भी संबंध बिगड़े तो पाकिस्तान क्षेत्र में अलग-थलग पड़ जाएगा, क्योंकि अफगानिस्तान और भारत से उसके संबंध पहले से ही खराब हैं।
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क्या दलदल में कूद रहा पाकिस्तान?
पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार डॉन ने अपनी पत्रिका में लिखा, 'पाकिस्तान, तुर्की या किसी भी अन्य बाहरी पक्ष के लिए यमन के दलदल में कूदना नासमझी होगी। पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ दशकों पुराने रक्षा संबंध हैं और यह समझौता इस रिश्ते को और मजबूत करता है। पवित्र शहरों की रक्षा भी एक संवेदनशील मुद्दा है और पाकिस्तान ने अतीत में इनकी सुरक्षा के लिए सैनिक भेजे हैं। लेकिन यमन के गृहयुद्ध में घसीटा जाना एक बिल्कुल अलग बात है।'
भारत पर कैसे पड़ सकता है असर?
हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र से बचने की चेतावनी दुनियाभर को दी है। अगर पाकिस्तान के साथ जंग छिड़ती है तो अरब सागर के रास्ते मध्य-पूर्व का हवाई मार्ग भी खतरे में पड़ सकता है। लाल सागर, अदन की खाड़ी और अरब सागर में भी जंग छिड़ने की आशंका है। ईरान और हूती विद्रोहियों की मंशा जंग को हिंद महासागर तक घसीटने की है, ताकि अधिक से अधिक देशों पर जंग का असर पड़े और अमेरिका पर दबाव बढ़ाया जा सके।
हिंद महासागर में छिड़ी जंग किसी भी लिहाज से भारत के हित में नहीं होगी। यूरोप के साथ होने वाला भारत का व्यापार खतरे में पड़ सकता है। लाल सागर से आने वाली ईंधन की खेप भी संकट में होगी। विकल्प के तौर पर भारत को दक्षिण अफ्रीका के रास्ते व्यापार करना पड़ सकता है। इससे ढुलाई लागत और परिवहन का समय बढ़ जाएगा।
यमन में छिड़ी भीषण जंग
करीब एक महीने से छिड़ी जंग में सऊदी अरब ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार की सेना को सऊदी अरब से भारी सहायता मिल रही है। 100 से अधिक लड़ाकू विमान जंग में उतर चुके हैं। लाल सागर तट से राजधानी सना तक भीषण जंग छिड़ी है। सऊदी अरब के हमलों के जवाब में हूती विद्रोहियों ने राबिग स्थित अरामको प्लांट और राजधानी रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट पर हमला किया।
