पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट में शुक्रवार पूरी रात पुलिस और उद्रवादियों के बीच मुठभेड़ चली। हमलावरों ने शुक्रवार दोपहर को विस्फोटक से भरी एक गाड़ी मस्जिद से भिड़ा दी थी। एक अन्य उग्रवादी ने स्पेशल ब्रांच की इमारत के आगे खुद को उड़ा लिया था। धमाके में 31 लोगों की जान गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए।
आठ उग्रवादी पुलिस लाइन की अलग-अलग इमारतों में फैल गए। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक शुक्रवार दोपहर से शुरू हुई मुठभेड़ पूरी रात जारी रही। सुरक्षा बलों ने आठ उग्रवादियों को मार गिराने का दावा किया। सोशल मीडिया पर मुठभेड़ के कई वीडियो वायरल हैं। इसमें पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने दीवारों के सहारे मोर्चा संभाल रखा है। दोनों तरफ से भारी फायरिंग हो रही है।
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31 मृतकों में 17 पुलिसवाले
उग्रवादियों ने कोहाट की ओल्ड पुलिस लाइन को अपने कब्जे में लिया था। खैबर पख्तूनख्वा पुलिस, सीटीडी, एलीट फोर्स के कमांडो और सुरक्षा बलों ने घंटों की मुठभेड़ के बाद इमारत को खाली कराने में कायमाबी हासिल की। खैबर पख्तूनख्वा पुलिस का दावा है कि रातभर चले ऑपरेशन में आठ उग्रवादियों को मार गिराया गया है। वहीं 31 मृतकों में 17 पुलिसकर्मी और छह नागरिक भी शामिल है।
आईजी पर ग्रेनेड से हमला
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक पूरे ऑपरेशन की अगुवाई सीटीडी के अतिरिक्त आईजी और कोहाट के क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी ने किया। अभियान के दौरान उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड से हमला किया। इसमें अतिरिक्त आईजी के हाथ में चोट आई है। कोहाट के जनरल ऑफिसर कमांडिंग भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। उग्रवादियों ने स्पेशल ब्रांच की इमारत को अपने कब्जे में ले लिया था। घंटों की मशक्कत के बाद इमारत को मुक्त कराया गया है।
बता दें कि साल 2010 में रमजान के दौरान इफ्तार में कोहाट पुलिस लाइन के पीछे स्थित पुलिस कॉलोनी में भी एक बड़ा धमाका हुआ था। इसमें 20 लोगों की जान गई थी और 90 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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कौन है फितना अल-ख्वारिज?
पाकिस्तान की सरकार ने हमले का आरोप फितना अल-ख्वारिज पर लगाया है। यह शब्द तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान में टीटीपी पकड़ मजबूत बनी है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा में लगातार हमलों ने पाकिस्तान की सेना को भी दुविधा में डाल दिया है। वर्षों तक जिन आतंकवादियों को पाकिस्तान ने पनाह दिया। आज वही सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।
